बाबूल मोर कच्ची कलियां न तोड़ अभियान:घर घर जाकर समझाए बाल विवाह न करे


आगर-मालवा-बाल विवाह एक अभिशाप है। इसके कई दुष्परिणाम होते है, जिनका सामना बाल विवाहित बच्चों को अपने सम्पूर्ण जीवन में करना पड़ता है। लोगों की बाल विवाह जैसी भ्रांतियों को दूर कर बच्चों का निर्धारित उम्र पूरी करने पर विवाह करने हेतु समझाईश दी जाए। गांवों में अधिक से अधिक दीवार लेखन करवाएं। डोर-टू-डोर जाकर बाल विवाह की जानकारी लें। बाल विवाह संज्ञान में आने पर तत्काल परिवारजनों से सम्पर्क कर उन्हें समझाईश दी जाकर, उसे रूकवाने की कार्यवाही करें। उक्त बात कलेक्टर संजय कुमार ने शनिवार को जिला पंचायत भवन में ''बाबूल मोरा-कच्ची कलियां न तोड़'' अभियान पर सचिव, रोजगार सहायक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं पटवारी की एक दिवसीय कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए कही। कलेक्टर ने कहा कि गांवों में कहीं बाल विवाह होता है, तो उसकी सम्पूर्ण जवाबदारी वहां के मैदानी अमले की होगी। इस हेतु गांवों में होने वाले प्रत्येक विवाह की जानकारी रखी जाएं। परिवारजनों से विवाह करने वाले लड़के-लड़की के उम्र प्रमाण यथा- जन्मतिथि प्रमाण पत्र, अंकसूची आदि से सत्यापन करें। सत्यापन में उम्र कम पाए जाने पर किसी भी स्थिति में बाल विवाह न होने दिया जाए। उन्होंने कहा कि इस वर्ष जिले में एक भी बाल विवाह न होने देने की, जिला प्रशासन की इस मंशा को साकार करने हेतु सभी संबंधित विभाग का मैदानी अमला अपने स्तर पर सक्रिय होकर पूरी ईमानदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए बाल विवाह रूकवाएं। 
  कार्यशाला में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्रीमती अंजली जोसेफ, एसडीएम महेन्द्र सिंह कवचे, महिला बाल विकास अधिकारी डाॅ. निशीसिंह, परियोजना अधिकारी दीपक बडोले सहित सभी संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहें। 
   कलेक्टर ने कहा कि 18 वर्ष से कम आयु की बालिका एवं 21 वर्ष से कम आयु का बालक का विवाह बाल विवाह की श्रेणी में आता है। जो कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत् दण्डनीय अपराध है। बाल विवाह केे तहत् वर-वधू के माता-पिता, विवाह कराने वाले धर्म गुरू सहित सेवा प्रदाता सभी दोषी है। जिन्हें अधिनियम के तहत् दो वर्ष का सश्रम कारावास या 01 लाख रुपए तक जुर्माना अथवा दोनों से दण्डित किया जा सकता है। 
  कलेक्टर ने कार्यशाला में ''मेरा बच्चा'' अभियान की बारे में कहा कि जिले में लगभग 1100 बच्चे कुपोषित है, जिन्हें सुपोषित करने हेतु जनप्रतिनिधि, शासकीय सेवक आगे आएं। ऐसे बच्चों को गोद लेकर उन्हें आवश्यक पोषण आहर उपलब्ध कराते हुए सुपोषित करने की जिम्मेदारी लें। उन्होंने कार्यशाला में उपस्थित कर्मचारियों से भी कहा कि गांव में सक्षम लोगों को कुपोषित बच्चों को सुपोषित करने हेतु गोद लेने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि कुपोषित बच्चों को गोद लेकर सुपोषित करने वाले को सम्मानित भी किया जाएगा। उन्होंने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से कहा कि अति कमवजन एवं कुपोषित बच्चों को एनआरसी में भर्ती करवाएं, जिससे कि वह चिकित्सकों की देखरेख व आवश्यक पोषण आहार मिलने से वह सुपोषित हो सके।
  कार्यशाला में महिला बाल विकास अधिकारी द्वारा ''बाबूल मोरा-कच्ची कलियां न तोड़'' अभियान एवं ''मेरा बच्चा'' अभियान पर विस्तृत प्रकाश डाला गया। उन्होंने गांवों में बाल विवाह की रोकथाम हेतु मैदानी अमले द्वारा की जाने वाली गतिविधियों की विस्तार से जानकारी दी।