पहाड़ो में प्रकट हुई माँ हरसिद्धि, 2000 वर्षो से प्रज्वलित हो रही है अखण्ड जोत

आगर मालवा- बीजानगरी के राजा विजयसिंह के नाम पर इस गांव का नामांकरण किया गया था। यहां मां हरसिद्धि विराजित है। राजा प्रतिदिन घोड़े पर सवार होकर उज्जैन स्थित हरसिद्धि मंदिर में दर्शन करने जाया करते थे। वे बीजा नगरी से चलकर तनोडिय़ा पहुंचते थे और यहां से घोड़ा बदलकर उज्जैन जाते थे। बताया जाता है कि मां ने राजा के ख्वाब में आकर कहा कि अब उज्जैन दर्शन के लिए नहीं आना पड़ेगा। मैं स्वयं बीजानगर में प्रकट हो रही हूं। राजा ने सुबह यह बात अपने प्रजाजनों को बताई और जंगल में जाकर देखा तो मां स्वयं पहाड़ों के मध्य से गांव में प्रकट हो चुकी थी। इस मंदिर में भी बड़ौद सहित आसपास के क्षेत्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। पं. रामचंद्र व्यास के अनुसार नवरात्रि पर्व के दौरान मां के दरबार में दूरदराज से भी श्रद्धालु आते हैं। मां हरसिद्धि दिन में तीन बार रुप बदलती है। नवरात्रि में यहां भी खासी चहल पहल रहती है। माँ के मंदिर में अखंड ज्योति प्रज्जवलित हो रही है। यह प्रसिद्ध मंदिर जिला मुख्‍यालय आगर से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।


 2000 वर्षी से प्रज्वलित हो रही माता रानी की अखंड जोत
 हरसिद्धि माता मंदिर में लगभग 2000 वर्षों से अखंड जोट प्रज्ज्वलित है जो कि हवा चलने पर निर्वाध रूप से प्रज्वलित रहती है। यहां जल रही अखंड ज्योति को जलाने में डेढ़ क्विंटल तेल प्रतिमाह लगता है, जबकि नवरात्रि के दौरान 10 क्विंटल तेल लग जाता है मंदिर के बारे में कहा जाता है यहां कई प्रकार के चमत्‍कार होते रहते हैं। इस मंदिर की ख्याति दूरदराज तक फैली हुई है। पंडित रामचंद्र व्यास बताते है कि माता के दरबार प्रदेश के कई बड़े नेता शीश नवाने आते है।


तीन रूपो में होते है दर्शन,बनाते है स्वस्तिक



श्रद्धालुओं के मुताबिक, दिनभर में माता के तीन रूप दिखाई देते है। मां की मूर्ति में सुबह बचपन का, दोपहर में जवानी का और शाम को बुढ़ापे का रूप नजर आता है। यहां मनौती के लिए श्रद्धालु गोबर से उल्‍टा स्वस्तिक बनाते हैं जब मन्नत पूर्ण हो जाती है तो वे पुन: मंदिर में आकर सीधा स्वस्तिक बनाते हैं। नवरात्रि में घट स्‍थापना के बाद से यहां पर नारियल नहीं फोड़ा जाता, अष्‍टमी के बाद ही यहां नारियल फोड़ा जाता है।यह भी अपने आप मे अनूठी परंपरा है। देखा जाता है कि नवरात्रि में अधिकतर माता मंदिरों भक्तो द्वारा नारियल फोड़ कर प्रसाद बांटा जाता है।