जानिए क्या है, षटतिला एकादशी व्रत की कथा और शुभ मुहूर्त?

हिन्दू धर्म के शास्त्रों के अनुसार षटतिला एकादशी के दिन भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है। कुछ लोग बैकुण्ठ रूप में भी भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। षटतिला एकादशी पर तिल का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन 6 प्रकार से तिलों का उपोयग किया जाता है। इनमें तिल से स्नान, तिल का उबटन लगाना, तिल से हवन, तिल से तर्पण, तिल का भोजन और तिलों का दान किया जाता है, इसलिए इसे षटतिला एकादशी व्रत कहा जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार यह एकादशी 20 जनवरी को पड़ेगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार एक समय नारद मुनि भगवान विष्णु के धाम बैकुण्ठ पहुंचे। वहां उन्होंने भगवान विष्णु से षटतिला एकादशी व्रत के महत्व के बारे में पूछा। नारद जी के आग्रह पर भगवान विष्णु ने बताया कि, प्राचीन काल में पृथ्वी पर एक ब्राह्मण की पत्नी रहती थी। उसके पति की मृत्यु हो चुकी थी। वह मेरी अन्नय भक्त थी और श्रद्धा भाव से मेरी पूजा करती थी। एक बार उसने एक महीने तक व्रत रखकर मेरी उपासना की। व्रत के प्रभाव से उसका शरीर तो शुद्ध हो गया परंतु वह कभी ब्राह्मण एवं देवताओं के निमित्त अन्न दान नहीं करती थी, इसलिए मैंने सोचा कि यह स्त्री बैकुण्ठ में रहकर भी अतृप्त रहेगी अत: मैं स्वयं एक दिन उसके पास भिक्षा मांगने गया। जब मैंने उससे भिक्षा की याचना की तब उसने एक मिट्टी का पिण्ड उठाकर मेरे हाथों पर रख दिया। मैं वह पिण्ड लेकर अपने धाम लौट आया। कुछ समय बाद वह देह त्याग कर मेरे लोक में आ गई। यहां उसे एक कुटिया और आम का पेड़ मिला। खाली कुटिया को देखकर वह घबराकर मेरे पास आई और बोली कि, मैं तो धर्मपरायण हूं फिर मुझे खाली कुटिया क्यों मिली? तब मैंने उसे बताया कि यह अन्नदान नहीं करने तथा मुझे मिट्टी का पिण्ड देने से हुआ है। मैंने फिर उसे बताया कि जब देव कन्याएं आपसे मिलने आएं तो आप अपना द्वार तभी खोलना जब तक वे आपको षटतिला एकादशी के व्रत का विधान न बताएं। स्त्री ने ऐसा ही किया और जिन विधियों को देवकन्या ने कहा था उस विधि से षटतिला एकादशी का व्रत किया। व्रत के प्रभाव से उसकी कुटिया अन्न धन से भर गई। इसलिए हे नारद इस बात को सत्य मानों कि, जो व्यक्ति इस एकादशी का व्रत करता है और तिल एवं अन्नदान करता है उसे मुक्ति और वैभव की प्राप्ति होती है।षटतिला एकादशी के व्रत पारण का शुभ मुहूर्त – एकादशी के अगले दिन यानी 21 जनवरी को 07:14:05 से 09:21:28 तक।


Popular posts
कोरोना से कब मिलेगी पृथ्वी को निजात.... 👏👏👏 ब्यावर के एस्ट्रोलॉजर दिलीप नाहटा की भविष्यवाणी .... गुरु हस्ती कृपा से ग्रहों के अनुसार पृथ्वी पर आने वाले अगले लगभग 175 दिनों तक यानी 23 सितंबर 2020 तक विश्व के कई देशों में कोरोना जैसे वायरस या अन्य तरह के कई वायरसों से या प्राकृतिक आपदाओं से या युद्ध से तबाही होने के संकेत परंतु भारत को आने वाले लगभग 90 दिनों तक बेहद संभलकर चलने की जरूरत यानी लगभग 06 जुलाई 2020 तक भारत इस वायरस पर पूरी तरह से अंकुश लगाने में हो जाएगा कामयाब , इसके अलावा 29 अप्रैल 2020 को पृथ्वी के पास से गुजरने वाले एस्टरॉयड से नहीं होगा दुनिया का अंत , कहते हैं ब्रह्मांड में कोई ईश्वरीय शक्ति मौजूद है , यदि नाहटा के बताए गए मंत्रों को पूरे भारतवासी कर गए तो नाहटा का मानना है कि जल्दी ही आज से 40 दिनों के भीतर यानी 14 मई 2020 तक भारत इस वायरस पर काबू पाने में सफल हो जाएगा और इन मंत्रों को करने वालों को यह वायरस छू भी नहीं सकेगा , इसके अलावा देश सेवा हेतु लोक कल्याण की भावना के उद्देश्य से नाहटा पूरे देशभर की जनता को हिम्मत देने हेतु यानी देशभर की जनता का मनोबल बढ़ाने के उद्देश्य से 06 अप्रैल 2020 से ज्योतिष के माध्यम से नाहटा बिल्कुल निशुल्क रूप से प्रतिदिन लोक डाउन तक देशभर की जनता के द्वारा पूछे गए दो सवालों का जवाब देंगे एवं नाहटा ने भारत सरकार को दिए सात नए सुझाव , इस एप्स में जानिए पूरी डिटेल्स .....
Image
Prediction of Beawar's Astrologer Dilip Nahta on 04 May
Image
आगर पुलिस को मिली बड़ी सफलता:चार पहिया वाहन चोर गिरोह पकड़ाया:यूपी में बेचते थे चोरी की गाड़िया
Image
धरती पर अब एक नया हीरो आ गया है और आपको हीरो के बारे में यह चीज़ें ज़रूर जाननी चाहिए
Image
काटेलाल एंड संस’ की जिया शंकर ने कहा, फैशन रोजमर्रा की जिन्दरगी की हकीकत से बचने का एक हथियार है
Image