चिंतन:मिलावट के खेल से जब आहत हुई इंसानीयत तो शुरू हुवा शुद्ध के लिए युद्ध

बच्चे, युवा, बूढ़े महिला- पुरुष सभी की दिनचर्या के शुरुआत से लेकर रात्रि शयन  कार्य करने के लिए  ईंधन या ऊर्जा के रूप में खाद्यान्न का उपभोग करते है। 
शुद्ध खाद्य सामग्री के लिए भी अभियान चलाकर युद्ध करने की नौबत क्यों आ गई है। ये एक गंभीर चिंतन का विषय है। जो हमे सोचने पर मजबूर कर रहे है कि देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान, कितना बदल गया इंसान- अपने बच्चों एवं परिवार को पालने के लिए क्या दूसरे के परिवार एवं बच्चों को मौत के मुंह मे धकेलने तक से बाज नही आता।
यूरिया,डिटर्जेंट, शैम्पू से दूध, वनस्पति एसेंस से नकली घी, मूंगफली सरसो का तेल, मिनरल आयल से काली मिर्ची की पॉलिशिंग, तुअर दाल पर मेटानिल येलो कलर करना, इमली के स्थान पर टार्टरिक की चटनी, मिठाई की सजावट में चांदी की जगह एलुमिनियम वर्क लगाना, धनिया पाउडर में डंठल व घोड़े की लिद्द, मिर्ची में अखाद्य रंग, हल्दी में पीली मिट्टी, चावल का पाउडर, पोटेशियम डाई क्रोमेट जैसे जानलेवा केमिकल की मिलावट। फ्लेवर्ड जूस, इमली, संतरा, कच्चा आम, अमरूद के स्वाद की टॉफी, चॉकलेट के नाम पर आर्टिफीशियल फ्लेवर मिलकर बच्चों के साथ धोखा।  क्यों ये सब मनुष्य की जान से खिलवाड़ या ग्राहक से धोखा नही है। 




कल्पना कीजिये ये सब किसी बीमार या बच्चे के द्वारा प्रतिदिन सेवन किया जायेगा तो उसके शरीर को वृद्धि या ऊर्जा मिलेगी या धीमा जहर। उस व्यक्ति पर क्या बीतेगी जब उसे पता चलेगा की 500-550 रुपये किलो में खरीदा घी , घी न होकर 80-90 रुपये किलो वाला ह्यड्रोजिनेटेड ऑइल/ वनस्पति / कुकिंग मीडियम उसे घी के नाम से बेचकर, प्रसव उपरांत उसकी पत्नी या बच्चों को असली घी समझ कर खिला दिया। 
"सर्वे भवन्तु सुखिना, सर्वे संतु निरामय। " वासुदेव कुटुम्बकम  को मानने वाले राम कृष्ण की धरती पर अब अन्न जैसी पवित्र वस्तु को भी अपने ऐशोआराम के चंद पैसे के लिए मिलावट करने से बाज नही आ रहे। ऐसे में खुफिया सूचना, एवम स्वास्थ्य विभाग की विश्लेषण रिपोर्ट के आधार पर 19 जुलाई 2019 से  खाद्य सामग्री में मिलावट खिलाफ मुख्यमंत्री माननीय कमल नाथ एवं लोक स्वास्थ्य, परिवार कल्याण मंत्री  तुलसीराम सिलावट  के निर्देश पर राज्य शासन ने अभिनव पहल "शुद्ध के लिए युद्ध अभियान" की शुरआत की है। अब विभाग खाद्य सुरक्षा अधिकारी गुप्त सूचना, शिकायत, एवं आकस्मिक निरीक्षण तथा छापामार कारवाही कर अपद्रव्यों, खाद्य के नमूने लेकर जांच हेतु प्रयोगशाला भेजते है, फिर राज्य खाद्य प्रयोगशाला से प्राप्त जांच रिपोर्ट के आधार पर, संबंधित खाद्य कारोबारी के विरुद्ध अपराध अनुसार, अर्थदंड, छः माह से आजीवन कारावास, एफ़.आई.आर.तथा रासुका तक की कार्यवाही की जा रही है।
जनता को भी जागरूक करने के लिए जन जागरूकता रैली से लेकर विद्यालयीन एवं महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के मध्य निबंध, भाषण, नुक्कड़ नाटक जैसी प्रतियोगिता संस्था, जिला एवं राज्य स्तर पर सम्पन्न कराकर, पुरुस्कार देने जैसी पहल इस बात का संकेत है कि सरकार अब घर तक इस अभियान को पहुँचाकर देश के भविष्य - बच्चों को सचेत कर समाज के दुश्मनो से लड़ने में सहयोग का आह्वान किया है।
प्रदेश में पहली बार मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ने खाद्य सुरक्षा विभाग के महत्व को समझा, सरकार की इस पहल से आमजन और विभागीय अधिकारी का आत्म विश्वास बड़ा है, यही वजह है कि अधिकारी भी दिन रात काम कर रहे है।
दुकानदारों, खाद्य कारोबारी को भी अब समझना होगा की बुरे काम का नतीजा बुरा ही होता है। सो दिन का चोर एक दिन जरूर पकड़ा जाएगा। भगवान के घर देर है, पर अंधेर नही। धोखे एवं अनुचित तरीके से कमाया गया धन फलीभूत नही होता।
समझ का फर्क -


यदि कोई दूध, खाद्य तेल, घी, मावा, मसाले, मिठाई, फल सब्जी में जाने या अनजाने में कोई मिलावट करता है तो वही खाद्य सामग्री समाज के परिस्थितिक तंत्र - शादी समारोह, जलपान, के दूसरे कारोबारी द्वारा आप, आपके परिवार, बच्चे को परोस कर, खिलाकर उपभोग कर दी जाती है।


फिर शुरुआत होती असर की कहानी


मिलावटी खाद्य सामग्री, के सेवन से पेट संबंधी विकार- उल्टी, दस्त, पेट दर्द, जी घबराने से लेकर किडनी, लिवर,  पित्ताशय की बीमारियां, मोटापा, कैंसर, उच्च रक्त चाप, ब्लड क्लोटिंग, आर्टरीज ब्लॉकिंग, हार्ट अटैक जैसे गंभीर रोग होने का खतरा रहता है। मिलावटी खाद्य सामग्री के दुष्प्रभाव का असर दो प्रकार से होता है जैसे फ़ूड पॉइजनिंग का असर तत्काल होता है जबकि शक्कर के स्थान पर सैकरीन, खाद्य के स्थान पर अखाद्य रंगों - मेटानिल येलो, कोलतार डाई का उपयोग, दूध में डिटर्जेंट, यूरिया की मिलावट, फ़ास्ट फ़ूड में अजीनोमोटो, पानमसाला में निकोटिन का मिश्रण, कोलेस्ट्रॉल युक्त वनस्पति / तेल को अधिक सेवन । ये सब धीमे जहर है। जो एन सी डी एस (असंचारी रोग) का मुख्य कारण है।


मुनाफा कमाने के लिए खाद्य पान की सामग्री में मिलावट करना, एक सामाजिक बुराई है। ऐसे भोले -भाले मिलावटकर्ता अपराधी समाज को जाने-अनजाने में खाद्य सामग्री के साथ मे कैंसर, मधुमेह, हार्ट अटैक, आर्टरीज ब्लॉकिंग, कुपोषण, मोटापा, जैसे गंभीर असंचारी रोग (एन सी डी एस) उपहार स्वरूप देकर स्वस्थ व्यक्ति को बीमार बनते है। फिर महंगी दवाई, ताकत की दवा,  मोटा पतला करने, गोरा करने वाली औषधि बेचकर आर्थिक रूप से कमजोर बना सकते है। इसलिए इनकी पहचान करने एवम इन्हें समाज की मुख्य धारा में लाने में प्रशासन का सहयोग करे।


मध्यप्रदेश सरकार की नई सोच, नई पहल ।
मिलावट मुक्त म प्र की और हमारे बढ़ते कदम।
कोई भी व्यक्ति मिलावट कर्ता की जानकारी या सूचना राज्य स्तर पर ई मेल fdampbhopal@gmail.com या दूरभाष 0755 2660690, 2665385 पर या स्थित स्थानीय मुख्य चिकित्सा एवम स्वास्थ्य अधिकारी के जिला कार्यालय में कर सकते है।  या कोई भी ग्राहक एफ़.एस.एस.ए.आई. के हेल्पलाइन नंबर 9868686868 पर दुकान के लाइसेंस नंबर  तथा फोटोग्राफ सहित व्हाट्सएप पर भी शिकायत कर सकते है।
सफेदपोश एवं कुछ माफिया गरोह राजनीतिक रसूक के जरिय तो कुछ गरीब भोले बनकर यदि व्यक्तिगत मुनाफ के लिए मिलावटखोरी को आश्रय/ पनाह या नजरअंदाज करते है तो मिलावट का ये नासूर एक दिन महामारी का रूप ले लेगा। क्यों न हम सब मिलावटखोरों के सामाजिक बहिष्कार की नई शुरुआत करे। साथ ही फ़ास्ट फ़ूड की बजाय खानपान संबंधी आदतों में सुधार एवं घर के खाने के साथ साथ ट्रेडिशनल खाने खिचड़ी, दलिया पुलाव, मोटे अनाज एवं फाइबर युक्त मौसमी फल सब्जी का उपयोग जैसे देशी खाने की और लौटना होगा जो स्वास्थ्यवर्धक भी है। दैनिक खाने में नमक, तेल, चीनी, मसाले एवं मैदा से बनी खाद्य सामग्री के संयमित या कम उपयोग से भी कई बीमारियों से बच सकते है। सस्ते एवम ऑफर के चक्कर मे कई बार समझदार व्यक्ति की इन मिलावट एवं मुनाफाखोरों के जाल में फंस जाते है। ऐसी स्थति में एक बे ये बात जरूर सोच ले कि कोई भी व्यापारी घाटे का सौदा या अनावश्यक ऑफर नही देगा। बड़े बड़े मॉल ,सेल में भी यदि कोई कंपनी पैक बंद वस्तु बहुत अधिक सस्ते दाम पर बेची जा रही है तो बेस्ट बिफोर अवश्य पढ़ ले, क्योंकि जिस खाद्य वस्तु की बेस्ट बिफोर/एक्सपाईरी नजदीक हो तो दुकानदार स्टॉक खत्म करने के लिए ऐसे करते है। ऐसी स्थिति में आवश्यकता की ही सामग्री खरीदे। क्योकि सुरक्षित आहार ही स्वस्थ का आधार है।


*लेखक खाद्य सुरक्षा अधिकारी के पद आगर मालवा में पदस्थ है।


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