नदियों के त्रिवेणी संगम पर विराजे है तारकेश्वर महादेव: ग्वालियर रियासत ने करवाया था निर्माण

सुसनेर। नगर से करीब 15 किलो मीटर दूर त्रिवेणी संगम पर स्थित क्षेत्र का प्रसिद्ध तारकेश्वर महादेव मंदिर श्रृद्धालुओ की आस्था का केन्द्र बना हुआ है। यह क्षेत्र कभी ग्वालियर रियासत का हिस्सा था। मंदिर निर्माण के सम्बंध में मान्यता है की ग्वालियर राजघराने के श्रीमंत सरकार जीवाजीराव के द्वारा मंदिर का निर्माण कराया गया था।
मोडी के समीप ग्राम ताखला में लखुंदर,कालीसिंध तथा भाटन नदी का त्रिवेणी संगम होने से इस स्थान का विशेष महत्व माना जाता है। श्रावणमास में इस त्रिवेणी संगम पर भक्तो की भीड उमड़ती है। इस प्राकृतिक स्थल की आकर्षक छटा पर्यटको को अपनी ओर आकर्षित करने के साथ यहा आने वाले लोगो का मनमोह रही है। त्रिवेणी संगम पर आकर मिलने वाली लखुंदर, कालीसिंध ओर भाटन तीनो नदीयो के जल का दृश्य देखते ही बनता है। सावन में पहाडी से कल- कल बहता झरना भी श्रृद्धालुओ को अपनी ओर खींचता  है। इसी संगम के समीप कालीसिंध नदी के तट पर पूर्व दिशा में तारकेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर स्थित है। मंदिर का शिवलिंग स्वयंभू होकर बडे आकार का है। शिवलिंग के चारो ओर पीतल के कवच की जलाधारी लगी हुई है। ताखला में प्रति वर्ष कार्तिक पुर्णिमा पर एक दिवसीय मेले का आयोजन भी किया जाता है। इस दिन मेले में आने वाली युवतीया अच्छे वर की प्राप्ती के लिए नदी में द्वीप जलाकर कालीसिंध नदी की पूजा- अर्चना भी करती है।


सावन माह का फाईल फ़ोटो


शिलालेख पर उल्लेख है जानकारी
इस प्राकृतिक स्थल की जानकारी प्राचीन शिलालेख पर उल्लेखित है। जिसके अनुसार औकाफ डिपार्टमेंट ग्वालियर श्रीमंत सरकार जीवाजीराव साहब शिंदे अलीबहादुर के हुकुम से नदी कालीसिंध नदी, लखुंदर नदी ओर भाटन नदी के संगम व दुसरे पवित्र स्थानो पर नदी किनारे 300 गज तक हर तरह के शिकार करने की मनाही है। जो इस हुकुम को उसे ताजीराव ग्वालियर की दफा 263 के तहत सजा दी जाएगी। इस जानकारी के आधार पर इस स्थान को ग्वालियर रियासत के समय निर्मित होना बताया गया है।