चैत्र नवरात्री 2020:महाकवि कालिदास की आराध्य देवी माँ गढ़कालिका

 


उज्जैन- मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक नगरी उज्जैन जो विश्व भर में पहचान रखता है यहां स्थित ज्योतिर्लिंग महाकाल बाबा के कारण। विक्रमादित्य की यह नगरी अपने आप में एक और इतिहास छुपाए हुए है। वह इतिहास है माँ शक्ति का जो यहां गढकालिका के रूप में विराजमान है।



 कहा जाता है कि संस्कृत के महान कवि कालीदास को माँ गढकालिका के आशीर्वाद से ही ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। ऐसी मान्यता है कि प्रारंभिक जीवन में कालीदास अनपढ़ और मूर्ख थे। कालीदास एक बार एक पेड़ की जिस डाली पर बैठे थे उसी को काट रहे थे इस घटना पर उनकी पत्नी विद्योत्तमा ने उन्हें ऐसी फटकार लगाई जिसके फलस्वरूप तपस्या कर महामूर्खों की श्रेणी में आने वाले कालीदास गढ़कालिका देवी की उपासना कर महाकवि कालिदास बन गए।
उज्जैन में स्थित गढकालिका देवी का मंदिर आज के उज्जैन नगर में प्राचीन अवंतिका नगरी क्षेत्र में है। कालयजी कवि कालिदास गढकालिका देवी के उपासक थे। इस प्राचीन मंदिर का सम्राट हर्षवर्धन द्वारा जीर्णोध्दार कराने का उल्लेख मिलता है। गढ़कालिका के मंदिर में माँ कालिका के दर्शन के लिए रोज हजारों भक्तों की भीड़ जुटती है। तांत्रिकों की देवी कालिका के इस चमत्कारिक मंदिर की प्राचीनता के विषय में कोई नहीं जानता, फिर भी माना जाता है कि इसकी स्थापना महाभारतकाल में हुई थी, लेकिन मूर्ति सतयुग के काल की है। बाद में इस प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार सम्राट हर्षवर्धन द्वारा किए जाने का उल्लेख मिलता है। वही स्टेट काल में ग्वालियर के महाराजा ने इसका पुनर्निर्माण करावाया था।
सती के मृत शरीर के अंग जहाँ जहाँ गिरे वहाँ वहाँ शक्तिपीठों की स्थापनी की गई। उज्जैन में ‍शिप्रा नदी के तट के पास स्थित भैरव पर्वत पर माँ भगवती सती के ओष्ठ गिरे थे। जिस कारण यहाँ शक्तिपीठ की स्थापना हुई। तांत्रिकों की देवी कालिका के इस चमत्कारिक मंदिर की प्राचीनता के विषय में कोई नहीं जानता, पर पुराणों में उल्लेख जरूर मिलता है।यहाँ पर नवरा‍त्रि में लगने वाले मेले के अलावा भिन्न-भिन्न मौकों पर उत्सवों और यज्ञों का आयोजन होता रहता है। माँ कालिका के दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग आते है। यहां नवरात्री पर्व पर भक्तों की भीड़ और देवी दर्शन के लिए उज्जैन में नवरात्री की धूम मचती है। कोई भक्त ने उपवास रख कर माता की आराधना की है, तो कोई चप्पल छोड़ कर अपना प्रण पूरा करता दिख जाएगा। यहां दोनों ही नवरात्री में गढ़ कालिका मंदिर में माँ कालिका के दर्शन के लिए रोज हजारों भक्तों की भीड़ जुटती है। माँ गढ़ कालिका पर भक्तों की श्रद्धा देखते ही बनती है।
महाकवि कालिदास द्वारा रचित 'श्यामला दंडक' महाकाली स्तोत्र एक सुंदर रचना है। ऐसा कहा जाता है कि महाकवि के मुख से सबसे पहले यही स्तोत्र प्रकट हुआ था। यही नहीं उज्जैन में अंतरराष्ट्रीय रूप से आयोजित होने वाले कालिदास समारोह के आयोजन के पूर्व माँ कालिका की आराधना की जाती है।