उपचुनाव आगर:भाजपा के कब्जे वाली विधानसभा सीट पर लगी प्रत्याशियों की झड़ी,फिलहाल स्थानीय बनाम बहारी बना चर्चा का विषय

आगर-मालवा। देश व प्रदेश इन दिनों कोरोना व राजनीति के वायरस से उबल रहा है। पूरे देश में कोरोना को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। वहीं प्रदेश में कोरोना के साथ अपने विधायकों को बचाने की जुगत चर्चा की विषय बना रहा है। आगर भी इससे अछूता नहीं है। यहां की विधानसभा सीट आगर विधायक मनोहर ऊंटवाल के निधन से रिक्त हो चुकी है। आगामी दिनों में यहां होने वाले उपचुनाव को लेकर दावेदारों की फेहरिस्त बढती ही जा रही है। शब्द संचार ने विधायक बनने के लिए उपचुनाव को लेकर शुरू हुई दावेदारों की दौड़धूप से शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर 11 से ज्यादा भाजपा दावेदारों के नाम प्रकाशित किये थे। भाजपा में एक अनार सौ बीमार की तर्ज पर दावेदारों की झडी लगी हुई है। गौरतलब रहे कि मध्यप्रदेश की राजनीति इन दिनों पूरे देश भर में सुर्खियां बटोर रही है।गत दिनों सुप्रीम कोर्ट के फ्लोर टेस्ट के आदेश के पहले ही मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपना त्यागपत्र राजपाल को सौप दिया।अब तक कांग्रेस सत्ता में थी मगर अब समीकरण बदल गए है
 आगर-मालवा विधानसभा सीट लंबे अरसे से भाजपा के कब्जे में रही है। यहां उपचुनाव को लेकर खासी धूम मची हुई थी। एक पखवाडे के दौरान प्रदेश के दिग्गज मंत्रियों के अलावा मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी दौरा किया था। कहानी आगे बढती इससे पहले ही प्रदेश की राजनीति गरमा गई। भाजपा दावेदारों की लंबी सूची स्थानीय दावेदारों को खटकने लगी है। कई बडे दिग्गज इस सीट से टिकट पाने के लिए दौडधूप कर रहे थे। इस फेहरिस्त में कई नये नाम जुड गये है। स्थानीय प्रत्याशी के अलावा सरल और सहजता के साथ शिक्षा को लेकर भी चर्चाएं होने लगी है। भाजपा ग्रामीण मंडल के महामंत्री डॉ. मोहन मकवाना स्थानीय दावेदार के रूप में तैयारियां कर रहे है। वे पूर्व में ग्रामीण मंडल अजा मोर्चा में भी महामंत्री का दायित्व निभा चुके है। उनकी पत्नी जनपद सदस्य भी रही है। विमुक्त-घुमक्कड अभिकरण के पूर्व प्रदेश संयोजक सरदारनाथ राठौर भी स्थानीय दावेदार के रूप में ताल ठोक रहे है। विमुक्त घुमक्कड जाति प्रकोष्ठ में पदों पर रहते हुए उन्होनें ख्याति अर्जित की है। भाजपा अब तक नये चेहरों पर दांव लगाती आई है। 2003 से ही इस विधानसभा सीट पर लगातार नये उम्मीदवारों को अजमाया जा रहा है। मनोहर चौहान भी ऐसे ही स्थानीय दावेदारों में शामिल है। वहीं पिछले 3 विधानसभा से टिकट की मांग कर रहे है। मनोहर की जगह मनोहर को मौका दिये जाने की चर्चा भी चौराहों पर सुर्खियां बटौर रही है। ग्राम कुृंडलाखेडा निवासी


नारायण बागाना भी स्थानीय दावेदारों में शामिल है। वे भी संगठन में विभिन्न प्रकोष्ठों में कई वर्षों से पार्टी का दायित्व बखुबी निभा रहे है। रामपुर भुण्डवास के गिरधारीलाल मालवीय व आगर के युवा नेता गिरधारीलाल मालवीय भी स्थानीय दावेदारों में शामिल है। भाजयुमो के


ओम मालवीय भी सोशल मीडिया पर प्रत्याशी बनाये जाने को लेकर चर्चित है।


मधु गहलोत भी भाजपा  से टिकिट की मांग कर रहे है। वे पहले मनोहर ऊँटवाल के सामने कांग्रेस के टिकिट पर चुनाव लड़ चुके है। गत दिनों आगर में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के आगर  आगमन पर मधु गहलोत ने बडौद रोड चौराहे पर जोरदार स्वागत किया।उन्होंने कार्यकर्ताओ को छाता व अन्य प्रचार सामग्री वितरण कर अपने पक्ष में माहौल बनाया। बड़ी संख्या में आये कार्यकर्ताओ को सुबह से लेकर दोपहर तक पोहे का वितरण किया गया।


कांग्रेस से विपिन वानखेडे और राजकुमार गौरे
कांग्रेस में प्रत्याशी को लेकर ज्यादा संशय की स्थितियां नहीं है। स्थानीय दावेदारों द्वारा 2018 में स्थानीय प्रत्याशी का मुद्दा उठाया गया था। पार्टी ने एनएसयूआई के प्रदेशाध्यक्ष विपिन वानखेडे को प्रत्याशी बनाया था। वे बेहद मामूली अंतर से मनोहर ऊंटवाल से पराजित हुए थे। वहीं सोशल मीडिया पर 2014 में उपचुनाव लडने वाले राजकुमार गौरे के नाम पर भी सोशल मीडिया में माहौल बनाया जा रहा है। वानखेडे और गौरे दोनों नही ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर मेल-मुलाकात का पहला चरण निपटा चुके है।