मकर संक्रांति का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्त्व

 

1. संक्रांति :-  प्रति वर्ष मकर संक्रांति अलग-अलग समूह पर, विभिन्न प्रकार के वस्त्र परिधान कर, विभिन्न शस्त्र, भोज्य पदार्थ एवं अन्य नशे के साथ आती है। सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में जाने को संक्रांति कहा जाता है। एक संक्रांति से दूसरी संक्रांति की अवधि ही सूर्यमास है। वैसे तो सूर्य संक्रांति 12 हैं, लेकिन इनमें से चार संक्रांतियां महत्वपूर्ण हैं, जिनमें मेष, कर्क, तुला, मकर संक्रांति शामिल हैं।

2. मकर संक्रांति:-   सूर्यदेव जब धनु राशि से मकर संक्रांति पर जाते हैं तो मकर संक्रांति मनाई जाती है। 

3. सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का महत्व:-  सूर्य के धनु राशि से मकर राशि पर जाने का महत्व इसलिए अधिक है कि इस समय सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण हो जाता है। उत्तरायण देवताओं का दिन माना जाता है। 

4. ऐसे मनाएं संक्रांति :-   इस दिन प्रातःकाल उबटन आदि रोक तीर्थ के जल से मिश्रित जल से स्नान करें। यदि तीर्थ में जल उपलब्ध न हो तो जल में तिल स्नान कराएं। तीर्थ स्थान या नदियों में पवित्र स्नान करना अधिक महत्वपूर्ण है। 

स्नान के बाद नित्य कर्म और अपने आराध्य देव की आराधना करें। पुण्यकाल में दांत मांजना, कठोर बात, फसल और वृक्ष का भोजन, गाय, बफ़ेलो का दूध सीखना और धर्म काम विषयक कार्य कदापि नहीं करना चाहिए। इस दिन कातिलों की परंपरा है। 

5.मकर संक्रांति एक पुण्य पर्व:- उत्तरायण देवताओं का अयन है। यह पुण्य पर्व है। इस पर्व से शुभ कार्य की शुरुआत होती है। उत्तरायण में मृत्यु से मोक्ष प्राप्ति की संभावना बनी रहती है। पुत्र की राशि में पिता के प्रवेश से पुण्यवर्धक होता है साथ-साथ पापों का नाश होता है। सूर्य पूर्व दिशा से उदित होकर 6 माह दक्षिण दिशा की ओर तथा 6 माह उत्तर दिशा की ओर से पश्चिम दिशा में अस्त होता है। 

उत्तरायण का समय देवताओं का दिन और दक्षिणायन का समय देवताओं की रात होती है, वैदिक काल में उत्तरायन को देवयान और दक्षिणायन को पितृयान कहा गया है। मकर संक्रांति के बाद माघ मास में उत्तरायण में सभी शुभ कार्य होते हैं। 

6. मकर संक्रांति पर अपनी राशि के अनुसार दान करें: - मकर संक्रांति पर दान का बहुत महत्व है। इस दिन तिल, टुकड़ा, गुड़ एवं कंबल दान करने का महत्व है। अन्य अन्य भी दान दे सकते हैं। आइए जानें, राशि के अनुसार मकर संक्रांति पर क्या दान करें कि घर में शुभता और मंगल आने लगे। 

मेष : गुड़, मूँग दाना एवं तिल का दान। 

वृषभ : सफेद कपड़ा, दही एवं तिल का दान। 

मिथुन राशि: मूंग दाल, चावल का दान। 

कर्क : चावल, चांदी एवं सफेद तिल का दान। 

सिंह : ताम्बे, बर्तन एवं सोने के मोती का दान। 

कन्या: टुकड़ों, कंबल एवं हरे कपड़ों का दान। 

तुला : चाँदी, शकर एवं कोलम्बिया का दान। 

वृश्चिक: मूंगा, लाल कपड़ा एवं तिल का दान। 

धनु: पीला कपड़ा, खड़ी हल्दी एवं सोने का मोती दान। 

मकर : काला कंबल, तेल एवं काली तिल दान। 

कुंभ : काला कपड़ा, काली उड़द, विस्तार एवं तिल दान। 

मीन: रेशमी कपड़ा, चने की दाल, चावल एवं तिल दान। 

7. मकर संक्रांति का महत्व:- मकर संक्रांति एक ऐसा दिन है, जबकि धरती पर अच्छे दिन की शुरुआत होती है। ऐसा इसलिए होता है कि सूर्य दक्षिण की बजाय अब उत्तर की ओर जाने लगता है।

जब तक सूर्य पूर्व से दक्षिण की ओर गोचर करता है तब तक उसकी किरणें खराब मानी जाती हैं, लेकिन जब तक वह पूर्व की ओर उत्तर की ओर गति करती है तब तक उसकी किरणें स्वास्थ्य और शांति को बढ़ाती हैं।

          भगवान श्रीकृष्ण ने भी उत्तरायण का महत्वपूर्ण रूप धारण करते हुए गीता में कहा था कि उत्तरायण के छह मास के शुभ काल में, जब सूर्य देव उत्तरायण होते हैं और पृथ्वी प्रकाशमय हो जाती है, तब इस प्रकाश में शरीर का परित्याग करने से व्यक्ति का पुनर्जन्म नहीं होता है, ऐसे लोग ब्रह्म को प्राप्त होते हैं।

   इसके विपरीत सूर्य के दक्षिणायन होने पर पृथ्वी पर अंधकार उत्पन्न होता है और इस अंधकार में शरीर त्यागने पर पुनः जन्म लेना पड़ता है।

8. मकर संक्रांति पर सूर्य मंत्र: - मकर संक्रांति पर सूर्य देवता के साथ उनके इष्ट देव भी शुभ होते हैं। जानिए, आपकी राशि सूर्य का कौन सा नाम है आपके लिए शुभ और किस नाम से, संक्रांति आपके लिए शुभता और सफलता का वैभव लेकर आई है... 

 मेष : ॐ अचिंताय नम:ल    

वृषभ: ॐ अरुणाय नम: ल 

मिथुन : ॐ आदि-भुताय नम: 

कर्क: ॐ वसुप्रदाय नम:ल      

सिंह : ॐ भानुवे नम:ल कन्या : ॐ शांताय नम:ल

तुला : ॐ इंद्राय नम:ल         

वृश्चिक : ॐ आदित्याय नम:ल           

धनु: ॐ सर्वेय नम:

मकर: ॐ सहस्र किरणाय नम:ल  

कुंभ: ॐ ब्रह्मणे दिवाकराय नम:ल   

मीन: ॐ जयिने नम:।

9. मकर संक्रांति का वैज्ञानिक महत्व -

 पतंग महोत्सव:-

सुबह सूर्य उदय के साथ ही पतंग उड़ान शुरू हो गई थी। पतंग के पीछे का मुख्य कारण कुछ घंटे सूर्य के प्रकाश में घूमना है। इस मौसम में सुबह का सूर्य प्रकाश शरीर के लिए स्वास्थ्यवर्धक और त्वचा व हड्डियों के लिए अत्यंत प्रतिकूल प्रभाव डालता है। 

 तिल और गुड़ :-

जलवायु के मौसम में तापमान बहुत कम होने के कारण शरीर में रोग और बीमारियाँ जल्दी फैलती हैं। इसके लिए इस दिन गुड और तिल से बने मिष्ठान प्राप्त करें। इनका ताप पैदा करने वाले तत्व के साथ ही शरीर के लिए पोषक तत्व भी होते हैं। इसलिए इस दिन चमत्कारी से तिल और गुड़ के लोध मिलते हैं।                                                                                   

            - ल्लशुभम् भवतु ll-                                     
पं. दिनेश शास्त्री (ज्योतिषाचार्य) मध्य प्रदेश - आर.जे.आर.ए.एस. मो.नं. 8103211222, 8770817904

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