इंसान के संस्कार ही उसका श्रंगार है:पंडित नागर



सुसनेर। सुसनेर-जीरापुर मार्ग पर ग्राम मोडी में पंडित कमल किशोर नागर की सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। प्रतिदिन कथा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे है। स्थाई रूप से कई श्रद्धालु मोडी में ही रूके हुएं है उनके द्वारा प्रतिदिन कथा के बाद भजन-कीर्तन किए जाकर राम-नाम का सुमिरन व ओम नमो भगवते वासुदेवाय का जाप किया जा रहा है। साथ ही आयोजक समिति के द्वारा कथा स्थल पर ही प्रतिदिन 3 हजार लोगो को रोजाना चाय-नाश्ता व भोजन प्रसादी भी ग्रहण कराई जा रही है। कथा में तीसरे दिन पंडित नागर ने श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुएं कहां कि हमेशा याद रखना कि हमारे पास पैसा नहीं, परमात्मा ही रहेगा, इसलिए जीवन में कमाया धन अच्छा है तो उसका अच्छे कार्यो में सदुपयोग करो। उन्होने कहां कि हमें केवल बैंक की पासबुक नहीं, गीता ही जीवन से तारेगी। जब पैसा खराब होगा तो वह बैंको के ताले में ही पडा रहेगा। जिसका धन पुण्य कार्य में लगता है वह धन्य हो जाता है। जब हम तीर्थ जाते हैं तो पैसे लेकर जाते हैं और उधर से वापस आते है तो पुण्य लेकर आते हैं। पैसे खर्च हो जाते हैं परंतु पुण्य प्राप्त हो जाता है और हमारे साथ पुण्य जाता है। पैसा नहीं इसलिए पुण्य कमाना चाहिए।
कथा में तीसरे दिन पंडित नागर ने श्रद्धालुओ को सम्बोधित करते हुएं कहां कि जिस प्रकार स्त्री की मांग में लगा सिंदूर ,पांव में बिछिया हाथ में कंगन आदि सिद्ध करते हैं कि उसका कोई स्वामी है। ठीक उसी प्रकार इंसान के तिलक, जनेऊ और चोटी आदि बताते हैं कि वह संस्कारी है और उसका स्वामी ईश्वर है। इंसान के संस्कार ही उसका श्रृंगार है।