जानिए शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव  2020 में किन किन राशियों पर रहेगा

न्याय के देवता शनि ग्रह 24 जनवरी 2020 को धनु राशि को छोड़कर अपनी स्वराशि मकर में गोचर कर रहे है। धनु और मकर राशि मे पहले से ही शनि की साढ़ेसाती चल रही है। 24 जनवरी 2020 से कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण शुरू होगा। वर्ष 2020 में शनि की ढैया मिथुन, तुला राशि पर लगेगी।11 मई से लेकर 29 सितंबर 2020 तक शनि वक्री अवस्था में मकर राशि में गोचर करेंगे और वर्ष 2020 के अंतिम महीने अर्थात 27 दिसंबर को अस्त भी हो जायेंगे, जिसके कारण शनि का कुछ प्रभाव कम होता हुआ दिखाई देगा।
 
 शनि देव को न्याय के देवता कहा गया है। शनि देव की कृपा से जातक को हर कार्य में सफलता मिलती है। शनि देव सही के साथ हमेशा न्याय करते है। और गलत करने वालों को दंड देते है। 


आइये ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री  से जानते है शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव किन-किन राशियों पर पड़नेवाला है।


उनके जीवन में किस प्रकार के उतार-चढाव आने वाले है और किन उपायों को कर आप इन सभी प्रभावों को कम कर सकते हैं। सबसे पहले जानते हैं शनि के इस राशि परिवर्तन का सभी राशियों पर क्या होगा प्रभाव..


 मेष राशि पर प्रभाव :
 
 वर्ष 2020 में मेष राशि के जातकों को शनि से डरने की या शनि के अशुभ प्रभाव से डरने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि आपके ऊपर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव नहीं रहेगा।
 
 वृषभ राशि राशि पर प्रभाव :
 
 वर्ष 2020 में वृषभ राशि के जातकों को शनि के अशुभ प्रभाव से डरने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि आपके ऊपर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव नहीं रहेगा।
 
 मिथुन राशि पर प्रभाव :
 
 आपकी राशि से शनि इस समय सातवें भाव में गोचर कर रहे है, लेकिन वर्ष 2020 में शनि आपके अष्टम भाव में गोचर करेंगे। अष्टम भाव को मृत्यु का भाव भी कहा जाता है। शनि के इस राशि में आने से मिथुन राशि के जातकों पर अष्टम की ढैय्या की शुरुआत हो जायेगी, जिसके कारण आपके कामों में रूकावटे आयेंगी। वाणी पर कंट्रोल नहीं रहेगा, वाणी में कडवाहट दिखाई देगी। कामकाज में मेहनत का फल मिलने में बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। किसी से भी सोच-समझकर और संयम से व्यवहार करें अन्यथा आपके अंदर क्रोध बढेगा और आप अपना ही नुकसान करते चले जायेंगे।
 
 कर्क राशि पर प्रभाव :
 
 वर्ष 2020 में कर्क राशि के जातकों को शनि के अशुभ प्रभाव से डरने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि आपके ऊपर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रहा।
 
 सिंह राशि पर प्रभाव :
 
 वर्ष 2020 में सिंह राशि के जातकों को शनि के अशुभ प्रभाव से डरने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि आपके ऊपर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव नहीं रहेगा।
 
 कन्या राशि पर प्रभाव :
 
 वर्ष 2020 में कन्या राशि के जातकों को शनि के अशुभ प्रभाव से डरने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि आपके ऊपर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव नहीं रहेगा।
 
 तुला राशि पर प्रभाव :
 
 इस वर्ष 2020 में तुला राशि पर शनि की साढ़ेसाती नहीं रहेगी परन्तु शनि तुला राशि के चतुर्थ भाव में गोचर करेंगे। शनि के तुला राशि में आने से इस राशि के जातकों पर चतुर्थ भाव की ढैय्या शुरु हो जायेगी, जिसके कारण इस राशि के जातकों को शत्रु परेशान कर सकते है। स्वास्थ्य खराबी का सामना करना पड़ेगा या कोई पुरानी बीमारी आपको परेशान कर सकती है। नौकरीपेशा लोगों की मेहनत में इजाफ़ा होगा, थकावट महसूस होगी।
 
 वृश्चिक  राशि पर प्रभाव :
 
 वर्ष 2020 में वृश्चिक राशि के जातकों को शनि के अशुभ प्रभाव से डरने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि आपके ऊपर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव नहीं रहेगा।
 
 धनु राशि पर प्रभाव :
 
 धनु राशि पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव पहले से ही है। वर्ष 2020 में शनि धनु राशि के द्वितीय भाव में राशि परिवर्तन करेंगे, इसे धनभाव कहते है, इसलिए इनको कामकाज में लाभ होगा। इस वर्ष 2020 में स्वास्थ्य खराबी के हालात कई बार देखने को मिलेंगे और आपका धन भी इलाज पर खर्च होगा। इस वर्ष माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखे अन्यथा परेशानी उत्पन्न होगी। नया घर या भूमी से सम्बंधित कामों में रूकावटे आने के संकेत मिल रहे है। कोई भी काम जल्दबाजी में न करें।
 
 मकर राशि पर प्रभाव :
 
 मकर राशि पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव पहले से ही है। वर्ष 2020 मे शनि का गोचर इसी राशि में हो रहा है। मकर राशि के जातकों के लिए शनि की साढ़ेसाती का दूसरा चरण शुरू होगा, जिसके अनुसार इन राशि के लोगों की अपने भाई-बहनों से मित्रों से अनबन होगी। वैवाहिक जीवन में कलह बढ़ेंगे। पारिवारिक और गृहस्थ जीवन में उथल-पुथल देखने को मिलेगी। कामकाज में भी जरुरत से ज्यादा परिश्रम करने पड़ेंगे।
 
 कुंभ राशि पर प्रभाव :
 
 वर्ष 2020 में शनि न्याय के देवता आपकी राशि से बारहवें घर में गोचर करेंगे जिसके अनुसार कुंभ राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण शुरू होगा, जिसके कारण खर्चे की अधिकता रहेगी और आपकी आर्थिक स्थिति डगमगा सकती है। शत्रुओं से सावधान रहे, वो आपको परेशान करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते है। नौकरीपेशा लोगों को नौकरी से सम्बंधित दिक्कते आ सकती है। मन पर काबू रखे, किसी भी कार्य को जल्दबाजी में न करें और अपने गुस्से पर नियंत्रण रखें।  
 
 मीन राशि पर प्रभाव :
 
 वर्ष 2020 में मीन राशि के जातकों को शनि के अशुभ प्रभाव से डरने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि आपके ऊपर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव नहीं रहेगा।
 
 शनि प्रकोप से बचने के रामबाण उपाय.
 
 ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि एक मात्र ऐसा ग्रह बताया गया है जो एक साथ पांच राशियों पर सीधा प्रभाव डालता है। एक समय में शनि की तीन राशियों पर साढ़ेसाती और दो राशियों पर ढय्या रहती है। शनिदेव का स्वभाव क्रूर माना गया है और शनि की साढ़ेसाती और ढय्या के समय में प्रभावित राशि के लोगों को कड़ी मेहनत करना पड़ती है। अभी शनि की साढ़ेसाती कन्या, तुला और वृश्चिक पर है तथा ढय्या कर्क और मीन राशि पर है। यहां जानिए शनि की साढ़ेसाती और ढय्या के दोष दूर करने के रामबाण उपाय। अनुसार शनि देव को प्रसन्न करने के लिए उनकी स्तुति सर्वश्रेष्ठ है।
 
 शक्तिशाली है ये मन्त्र:
 
 कर्मफलदाता शनि देव को प्रसन्न करने के लिए शनि मंत्र सबसे अधिक प्रभावशाली माना जाता है। शनि की साढ़ेसाती हो या फिर ढैया सबके लिए शनि-मंत्र रामबाण उपाय है।
 
 शनिवार का दिन शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए अत्यंत शुभ दिन होता है। शनि दोष से मुक्ति पाने के लिए शास्त्रों में बहुत सारे उपाय बताए गए हैं लेकिन जो शक्ति शनि मंत्र है वह अन्य किसी उपाय में नहीं है।
 
 शनि स्तोत्र :
 
 नमस्ते कोणसंस्थाय पिडगलाय नमोस्तुते।
 नमस्ते बभ्रुरूपाय कृष्णाय च नमोस्तु ते।।
 नमस्ते रौद्रदेहाय नमस्ते चान्तकाय च।
 नमस्ते यमसंज्ञाय नमस्ते सौरये विभो।।
 नमस्ते यंमदसंज्ञाय शनैश्वर नमोस्तुते।
 प्रसादं कुरू देवेश दीनस्य प्रणतस्य च।।
 
 शनि के इस स्तोत्र का पाठ करने से शनि के सभी दोषों से मुक्ति मिलती है। शास्त्रों में ऐसा वर्णन है कि शनि देव को प्रसन्न करने के लिए इससे बेहतर कोई स्तोत्र नहीं है। इस स्तोत्र का कम से कम 11 बार पाठ करना चाहिए।
 
 वैदिक शनि मंत्र :
 
 " ऊँ शन्नोदेवीर भिष्टयऽआपो भवन्तु पीतये शंय्योर भिस्त्रवन्तुन : "
 
 पौराणिक शनि मंत्र :
 
 "ऊँ ह्रिं नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम।
 छाया मार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।"
 
 शनि महाग्रह मन्त्र :
 
 ॐ नमोऽहते भगवते श्रीमते मुनि सुव्रततीर्थ कराय बरुणयक्ष बहुरु-पिणीयक्षी सहिताय ॐ आं क्रों ह्रीं ह्रः शनिमहाग्रह मम दुष्टग्रह रोगकष्ट निवारण सर्व शांति च कुरू कुरू हूं फट् ।।
 
 इस मन्त्र का जप २३००० हजार करने का विधान दिया गया है।
 
 शनिदेव को खुश करने के लिए शनिवार को सूर्योदय से पहले जगकर पीपल की पूजा करने से शनिदेव खुश होते हैं। शनिवार को पीपल के पेड़ में सरसों का तेल चढ़ाने से शनि देव अति प्रसन्न होते हैं।
 
 शनिवार को संध्याकाल में इन मंत्रों का जाप करने से शनि का प्रकोप शांत होता है। साथ ही शनिदेव को इस मंत्र से पूजा करने से जो भी शनि की महादशा भी खत्म होती है।
 
 शनि व्रत :
 
 शनिवार का व्रत किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के प्रथम शनिवार से प्रारंभ करे और 19, 31 या 41 शनिवार तक करे। शनिवार के दिन प्रात: स्नान आदि करके काले रंग की बनियान धारण करे और सरसो के तेल का दान करे तथा तांबे के कलश मे जल, थोडे काले तिल​, लोंग​, दुध, शक्कर, आदि डाल के पीपल अथवा खेजडी के वृक्ष के दर्शन करते हुये पश्चिम दिशा कि तरफ़ मुख रखते हुये जल प्रदान करे. तथा "ॐ प्रां प्रीं प्रों स​: शनैश्चराय नम​: " इस बिज मंत्र का यथाशक्ति जाप करे। इस दिन भोजन में उडद दाल एवं केले और तेल के पदार्थ बनाये।
 
 भोजन से पुर्व भोजन का कुछ भाग काले कूत्ते या भिखारी को दे उसके बाद प्रथम 7 ग्रास उपरोक्त पदार्थ ग्रहण करे बाद में अन्य पदार्थ ग्रहण करे। अंतिम शनिवार को हवन क्रिया के पश्चात यथाशक्ति तील, छ्त्री, जुता, कम्बल​, नीला-काला वस्त्र​, आदि वस्तुओ का दान निर्धन व्यक्ति को करे। व्रत के दिन जल, सभी प्रकार के फल, दूध एवं दूध से बने पदार्थ या औषध सेवन करने से व्रत नष्ट नहीं होता है। व्रत के दिन एक बार भी पान खाने से, दिन के समय सोने से, स्त्री रति प्रसंग आदि से व्रत नष्ट होता है।
 
 शनि की साडेसाती के लिए.
 
 प्राचीन ज्योतिष में शनि की बुरी चाल से 3 बड़े चक्कर को साडेसाती कहा जाता है और इस से अलग अढाई वर्ष का ढैया कहा जाता है। शनि लग्न से चतुर्थ या अष्टम भाव में हो तो ढैया होता है एवं द्वादश, लग्न और द्वितीय भाव में शनि आये तो उसे साडेसाती कहा जाता है। शनि साडेसाती के बुरे परिणाम: सांप का डसना, शराब आदि का व्यसनी होना, मकान का बिक जाना या गिर जाना, घर में चोरी होना, पुलिश स्टेशन एवं कोर्ट के चक्कर खाना, वाहन गुम या चोरी हो जाना एवं वाहन का दुर्घटनाग्रस्त हो जाना, फैक्ट्री या मशीनों का बिक जाना या रुक जाना या बंद हो जाना।
 
 शनि साडेसाती और ढैया का उपाय :
 
 साडेसाती : द्वादश भाव में शनि हो तो शराब व मांस का सेवन न करे, लग्न में शनि हो तो किसी भी एक शनिवार को 50 ग्राम सुरमा जमीन में दबाये, बन्दर को गुड दे, द्वितीय भाव में शनि हो तो नंगे पैर मंदिर में दर्शन हेतु जाये। सांप को दूध पिलाए, तेल का दान करे, लोहे का सामान, चिमटा, तवा, अंगीठी ( रोटी पकाने का सामान ) आदि का दान करे, लोहे का छल्ला दाये हाँथ की मध्यमा उंगली में धारण करे।
 
 वैदिक ज्योतिष के मुताबिक़ भिन्न-भिन्न भावों में शनि का फल भी भिन्न-भिन्न होता है। शनि सूर्य-पुत्र के नाम से ख्यात है। कहते हैं कि शनि जिसे चाहे राजा से रंक बना देता है और रंक से राजा। आइए देखते हैं क्या हैं वे और भी उपाय जो शनि के प्रकोप को शान्त कर उनकी कृपा-दृष्टि को आकर्षित करते हैं।
 
 हनुमान चालीसा का पाठ :
 
 हनुमान चालीसा का नियमित पाठ शनिदेव के प्रकोप से बचने का रामबाण उपाय है। अगर आप ढैया या साढे साती से गुज़र रहे हैं और शनि द्वारा दिए कष्टों से पीड़ित हैं, तो हनुमान चालीसा आपके लिए अचूक औषधि की तरह है। जनश्रुति है कि हनुमान जी ने शनि देव को लंका में दशग्रीव के बंधन से मुक्त कराया था। ऐसा भी कहा जाता है कि कलियुग में अभिमानवश एक बार शनिदेव हनुमान जी के पास गए और बोले “तुमने मुझे त्रेता में ज़रूर बचाया था, लेकिन अब यह कलिकाल है। मुझे अपना काम करना ही पड़ता है। इसलिए आज से तुम्हारे ऊपर मेरी साढ़े साती शुरू हो रही है। मैं तुमपर आ रहा हूँ।
 
 यह कहते हुए वे हनुमान जी के मस्तक पर सवार हो गए। शनिदेव के कारण हनुमान जी को सर पर खुजली होने लगी, जिसे मिटाने के लिए उन्होंने सर पर एक विशाल पर्वत रख लिया। जिसके नीचे शनिदेव दब गए और “त्राहि माम् त्राहि माम्” चिल्लाने लगे। उन्होंने हनुमान जी से याचना की और कहा कि वे आगे से उन्हें या उनके भक्तों को कभी परेशान नहीं करेंगे। हनुमान चालीसा हनुमान जी के स्तोत्रों में बहुप्रचलित और अनन्त शक्तिसंपन्न है। इसका पाठ शनि के सभी कष्टों से मुक्ति दिलाने वाला कहा गया है ।
 
 तिल, तैल और छायापात्र का दान :
 
 तिल, तैल और छायापात्र शनिदेव को अत्यन्त प्रिय माने जाते हैं। इन चीज़ों का दान शनि की शान्ति का प्रमुख उपाय है। मान्यता है कि यह दान शनि देव द्वारा दिए जाने वाले कष्टों से निजात दिलाता है। छायापात्र दान की विधि बहुत ही सरल है। मिट्टी के किसी बर्तन में सरसों का तैल ले उसमें अपनी छाया देखकर उसे दान कर दें। यह दान शनि के आपके ऊपर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को दूर कर उनका आशीर्वाद लाता है।
 
 धतूरे की जड़ धारण करें :
 
 वैदिक ज्योतिष में विभिन्न जड़ों की मदद से ग्रहों की शान्ति का विधान है। कई ज्योतिषियों का मानना है कि रत्न धारण करना नुक़सान भी पहुँचा सक्ता है, लेकिन जड़ धारण करने से ऐसी आशंका नहीं रहती है। रत्न ग्रह की शक्ति बढ़ाने का काम करते हैं, वहीं जड़ियाँ ग्रहों की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में मोड़ने का कार्य करती हैं। शनिदेव को ख़ुश कर उनकी कृपा पाने के लिए ग्रन्थों में धतूरे की जड़ को धारण करने की सलाह दी गई है। धतूरे की जड़ का छोटा-सा टुकड़ा गले या हाथ में बांधकर धारण किया जा सकता है। इस जड़ी को धारण करने से शनि की ऊर्जा आपको सकारात्मक रूप से मिलने लगेगी और जल्दी ही आपको ख़ुद अन्तर महसूस होगा।
 
 सात मुखी रुद्राक्ष धारण करें :
 
 जड़ियों की ही तरह रुद्राक्ष को भी हानि रहित उपाय की मान्यता प्राप्त है। सात मुखी रुद्राक्ष धारण करना न सिर्फ़ भगवान शिव को प्रसन्न करता है, बल्कि शनिदेव का आशीर्वाद भी दिलाता है। पुराणों के अनुसार सात मुखी रुद्राक्ष धारण करने से घर में धन धान्य की कमी नहीं रहती है और लक्ष्मी मैया की कृपा हमेशा बनी रहती है। साथ ही सेहत से जुड़ी समस्याओं में भी इसे बहुत प्रभावी माना जाता है। इस रुद्राक्ष को सोमवार या शनिवार के दिन गंगा जल से धोकर धारण करने से शनि जनित कष्टों से छुटकारा मिलता है और समृद्धि प्राप्त होती है।
 
 यहाँ बताए गए ये छोटे-छोटे उपाय करने में सरल हैं और जल्दी असर दिखाते हैं। अगर श्रद्धा के साथ इन उपायों को किया जाए, तो शनि देव की वक्र दृष्टि से बचकर उनकी कृपा सहज ही हासिल की जा सकती है। इन सरल उपायों को काम में लाएँ और शनि देव के आशीष से अपना जीवन सुखमय बनाएँ।आप सभी पर शनि देव की कृपा बनी रहे आपका जीवन सुखमय रहे और शनि देव आपके उपाय और मंत्रोचारण से खुश हो कर शुभ प्रभाव दें।