चैत्र नवरात्री2020: अत्यंत चमत्कारिक है नलखेड़ा का द्वापरयुगीन बगलामुखी मंदिर:पांडवो ने की थी माँ की आराधना


नलखेड़ा-आगर जिले की नलखेेड़ा तहसील का मां बगलामुखी मंदिर विश्वभर में प्रख्यात है। प्राचीन तंत्र ग्रंथों में 10 महाविद्याओं का उल्लेख मिलता है। उनमें से बगलामुखी एक है। मां भगवती बगलामुखी का महत्व समस्त देवियों में सबसे विशिष्ट है। विश्व में इनके 3 ही महत्वपूर्ण प्राचीन मंदिर है, जिनमें से एक नलखेड़ा में स्थित है।


जहां मां बगलामुखी विराजित होती है, वह नगर प्राकृतिक आपदाओं से मुक्त होता है। यहां के बारे में मान्यता है कि मंदिर में स्थित प्रतिमा महाभारत कालीन है और राजा युधिष्ठिर द्वारा भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर कौरवों पर विजय पाने के लिए मां की आराधना की थी। बगलामुखी मंदिर में वैसे तो नित्य ही श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है, लेकिन चैत्रीय और शारदीय नवरात्र के दौरान यहां दूरदराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं। प्राचीन सिद्ध शक्तिपीठ मां बगलामुखी मंदिर को पाण्डवों की साधना स्थली के रूप में जाना जाता है। पूरी दुनिया में मां बगलामुखी के द्वापरयुगीन तीन सिद्धपीठ है, जिसमें नलखेड़ा सिद्धपीठ, उपपीठ नेपाल तथा तीसरा बिहार में है। मध्यप्रदेश के ही दतिया में भी मां बगलामुखी का मंदिर है। कौरवों पर विजय पाने के लिए पाण्डवों ने भगवान कृष्ण के कहने पर यहां बगलामुखी की आराधना की थी और युद्ध में कौरवों पर विजय पाई थी। काली पुराण के अनुसार मां बगलामुखी की स्थापना भीम के पुत्र बर्बरिक ने की थी। बर्बरिक स्वयं ही महातांत्रिक एवं सिद्ध थे। द्वापरयुगीन यह मंदिर अत्यंत चमत्कारिक है। मंदिर में माता बगलामुखी के अतिरिक्त मां लक्ष्मी, कृष्ण, हनुमान, भैरव तथा सरस्वती भी विराजित है। मान्यता है कि प्रतिमा स्वयंभू है। इस मंदिर में बगलामुखी मनोकामना पूरी करने व किसी भी क्षेत्र में विजय प्राप्त करने के लिए यज्ञ, हवन व पूजा पाठ कराते हैं। बगलामुखी माता मूलत: तंत्र की देवी है। इसलिए यहां तांत्रिक अनुष्ठानों का महत्व अधिक है। नवरात्रि में यहां भक्तों का हुजूम लगा रहता है। बगलामुखी का मंत्र 36 अक्षर का होता है। शत्रु विनाश, मोहन उच्चाटन और वशीकरण के लिए बगलामुखी देवी की आराधना की जाती है। भगवती को पीला रंग विशेष प्रिय है। इसी कारण मां बगलामुखी पीताम्बर धारण करती है।