चैत्र नवरात्री 2020:सम्राट विक्रमादित्य की आराध्य देवी जगतजनी माँ हरसिद्धि


  • उज्जैन-विश्वभर के 51 शक्तिपीठों में से एक अवंतिका नगरी स्थित मां हरसिद्धि का दरबार अतिप्राचीन है। यहां माता सती की कोहनी गिरी थी, इसलिए शक्तिपीठ कहलाया। यहां साधक तंत्र-मंत्र की सिद्धियों के लिए साधनाएं भी करते हैं। हर नवरात्र में मंदिर प्रांगण में लगे अति प्राचीन दो दीप स्तंभ भक्तों द्वारा प्रज्ज्वलित कराए जाते हैं, जिसके लिए एडवांस बुकिंग कराई जाती है। दूर-दूर से भक्त मां हरसिद्धि के दरबार अपनी अर्जी लेकर आते हैं।माँ का रमणीय दरबार बाबा महाकाल के मंदिर के पीछे कुछ दूरी पर ही स्थित है।अवंतिका सम्राट विक्रमादित्य की आराध्य देवी भी माँ हरसिद्धि है


 


यहां बने दीप स्तंभों पर दीपक लगाने से हर मन्नत पूरी होती है। मंदिर के गर्भगृह में अति सौम्य देवी की प्रतिमाएं मौजूद हैं, जिनके दर्शन मात्र से ही सुख-समृद्धि और वैभव प्राप्त होता है। मंदिर में दीप स्तंभों की स्थापना सम्राट विक्रमादित्य ने करवाई थी। दोनों स्तंभों में लगभग 1 हजार 11 दीपक हैं।
यह अद्भुत शक्तिपीठ हरसिद्धि के नाम से प्रसिद्ध है। हर समय यहां भक्तों की भीड़ रहती है। नवरात्र के समय धार्मिक व सांस्कृतिक आयोजन होते हैं। रात्रि को आरती में उल्लासमय वातावरण होता है। यह मंदिर महाकाल मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित है।हरसिद्धि चौराहे पर पहुचने के लिए जैसे ही महाकाल से निकलते है।रास्ते मे बड़ा गणेश मंदिर,विक्रमटीला पड़ता है।माता रानी के दरबार के पिछले हिस्से में चंद कदमो की दूरी पर संतोषी माता ,अगस्तेश्वर महादेव,मनोकामना सिद्ध हनुमान के मंदिर है।थोड़ी ही दूर पर पूण्य सलिला बहती है।रामघाट, सिद्ध आश्रम,चार धाम मंदिर भी इसी क्षेत्र में मौजूद है।
हरसिद्धि मंदिर तंत्र साधना और विशिष्ट सिद्धियां प्राप्त करने के लिए प्रसिद्ध है। महाकाल वन क्षेत्र में होने के कारण यहां सिद्धियां शीघ्र प्राप्त होती हैं, यही वजह है कि भक्त गुप्त साधनाओं में लीन रहकर चमत्कारिक सिद्धियां प्राप्त करते देखे जा सकते हैं। श्रीसूक्त और वेदोक्त मंत्रों के साथ होने वाली तांत्रिक साधनाओं का महत्व बहुत ज्यादा है। भक्तों की मनोकामनाओं को पूरा करने के लिए यहां विशेष तिथियों पर भी पूजन करवाया जाता है।