विशेष योग लेकर आ रहा है इस वर्ष 2020 का श्रावण महीना

हिंदू धर्म में सावन का महीना का बहुत ही महत्व है. इस महीने में जो भी भक्त सोमवार का व्रत रखता है उसकी सभी मनोकामनाएं भगवान शिव पूरी करते है। सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है. इस पूरे महीने शिवभक्त बड़ी ही श्रद्धा के साथ उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। सावन माह में पड़ने वाली शिवरात्रि अपना विशेष महत्व रखती है।


 


श्रावण मास में भगवान भोलेनाथ की पूजा बेल पत्र से और उन्हें जल चढ़ाना बहुत फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन का महीना भगवान शिव और विष्णु का आशीर्वाद लेकर आता है। माना जाता है कि देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए पूरे श्रावण मास में कठोरतप करके भगवान शिव को प्रसन्न किया था।इस बार श्रावण ( सावन) के महीने की शुरुआत और अंत दोनों ही सोमवार के दिन हो रही है। सावन महीने की शुरुआत और समापन सोमवार के दिन ही होगा जो धार्मिक नजरिए से एक अद्भुत संयोग है। इस बार इस वर्ष 2020 के सावन मास में ही 36 शुभ योग भी बन रहे हैं, जिससे सावन मास की शुभता और अधिक बढ़ जाएगी।


पण्डित दयानन्द शास्त्री बताते हैं कि इस वर्ष के श्रावण महीने की विशेष बात यह है कि इस बार सावन की शुरुआत उत्तराषाढ़ा नक्षत्र व वैधृति योग में होगी। इसके साथ ही चंद्रमा मकर राशि में विचरण करेगा। इससे इस बार सावन मास में जमकर बारिश होगी। सावन माह की शुरुआत उत्तराषाढ़ा नक्षत्र वैधृति योग तथा कौलव करण प्रतिपदा तिथि होने से अभी फलदायक वन सोमवार रहेगा। इस दिन भगवान शिव तत्व की साधना, आराधना, पूजा, व्रत मंगलकारी तथा अनिष्ट विनाशक सिद्ध होगा। यह पंचागीय संयोग में शिव पूजा के साथ लक्ष्मी नारायण भगवान की पूजा-अर्चना करना भी विशेष फलदाई रहेगी। मकर का चंद्रमा मेष राशि वालों के लिए विशेष शुभ तथा मिथुन, तुला और धनु राशि वालों के लिए थोड़ा कठिन प्रद रहेगा। शेष राशि वालों के लिए प्रथम वन सोमवार साधारण रहेगा। शिव पूजा से सर्वत्र लाभ-विजयश्री की प्राप्ति होगी।इस बार सावन के महीने में कुल 5 सावन पड़ेंगे। 6 जुलाई, 13 जुलाई, 20 जुलाई, 27 जुलाई और 3 अगस्त।इस बार के सावन में 11 सर्वार्थ सिद्धि, 10 सिद्धि, 12 अमृत और 3 अमृत सिद्धि योग का संयोग बन रहा है।


इस वर्ष सावन के महीने में कई प्रमुख व्रत और त्योहार भी मनाएं जाएंगे। जिनमें प्रमुख रूप से मंगला गौरी व्रत, एकादशी, हरियाली और सोमवती अमावस्या, नाग पंचमी और रक्षा बंधन के त्योहार होंगे। 


इस साल श्रावण मास में पांच सोमवार होंगे। यह भगवान शिव की पूजा- पाठ के हिसाब से शुभ संकेत देने वाले हैं। इससे एक दिन पहले 5 जुलाई को गुरु पूर्णिमा है।सावन का महीना भगवान शिव का महीना माना जाता है। यह भगवान शिव का बहुत ही प्रिय महीना होता है। 6 जुलाई से श्रावण मास की शुरुआत हो रही है। सावन के महीने में भगवान शिव को हर दिन जलाभिषेक करने और उनकी पूजा का विधान होता है। ऐसी मान्यता है कि जब सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु चार महीनों के लिए क्षीर सागर में निद्रा के लिए चले जाते हैं तब सृष्टि का भार भगवान शंकर अपने कंधों पर उठा लेते हैं। 6 जुलाई से सावन का महीना आरंभ होगा और 3 अगस्त को सावन का अंतिम दिन होगा।इस साल श्रावण मास में पांच सोमवार होंगे। यह भगवान शिव की पूजा- पाठ के हिसाब से शुभ संकेत देने वाले हैं। इससे एक दिन पहले 5 जुलाई को गुरु पूर्णिमा है।इस बार श्रावण मास की शुरूआत छह जुलाई 2020 से होने जा रही है इसी दिन सोमवार है। 


 


श्रावण में पांच सोमवार होंगे। वर्षों बाद ऐसा संयोग बना है।


ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार भगवान शिव की पूजा-पाठ का महत्व सावन के महीने में विशेष होता है। खासतौर से कुंवारी कन्याओं और विवाहिताओं के लिए। वहीं इस बार यह अनूठा संयोग सोमवार को शुरू होकर सोमवार को ही संपन्न हो रहा है। इसलिए भी इसका अलग महत्व माना जा रहा है। श्रावण माह भगवान शिव की महाआराधना का पर्व माना गया है। श्रावण प्रतिपदा को सोमवार, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, वैद्धति योग तथा कोलव नामक करण रहेगा, वहीं चंद्रमा मकर राशि में विचरण करेगा। पहला सोमवार 6 जुलाई को, दूसरा सोमवार 13 जुलाई को, तीसरा सोमवार 20 जुलाई को, चौथा सोमवार 27 जुलाई को और पांचवां व अंतिम सोमवार 3 अगस्त को रहेगा। इस वर्ष पांचों सोमवार को विशेष योग रहेंगे। इन योग में भगवान भोलेनाथ का रूद्राभिषेक करना बहुत ही श्रेष्ठ रहेगा।श्रावण मास में 10 जुलाई को मोनी पंचमी, 14 जुलाई को मंगला गौरी व्रत, 16 जुलाई को एकादशी, 18 जुलाई को प्रदोष, 20 जुलाई को हरियाली अमावस्या, सोमवती अमावस्या, 23 जुलाई को हरियाली तीज के साथ ही 25 जुलाई को नागपंचमी और 3 अगस्त को रक्षाबंधन मनाया जाएगा


पहले सोमवार को करें शिव के साथ लक्ष्मीनारायण की भी पूजा


छह जुलाई को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, वैधृति योग, कौलव करण, प्रतिपदा तिथि रहेगी। यह अभीष्ट फलदायक वन सोमवार रहेगा। मान्यता है कि इस दिन शिव तत्व की साधना और पूजा-अर्चना मंगलकारी, अनिष्ट विनाशक सिद्ध होगी।


दूसरा सोमवार : दूसरा सोमवार 13 जुलाई को होगा। इस दिन अष्टमी तिथि होगी, जिसके स्वामी शिव हैं। सोमवार को शिव तिथि का होना विशेष संयोग कारक है। दूसरे वन सोमवार को रेवती नक्षत्र रहेगा, जिसका स्वामी पूषण नामक सूर्य है। समस्त रुके हुए कार्य जल्दी ही संपन्न होंगे।


तीसरे सोमवार को ऋषि-पितृ-गो पूजन : सावन का तीसरा सोमवार 20 जुलाई को रहेगा। अमावस्या तिथि रहेगी जो हरियाली अमावस्या के रूप में मनेगी। इस दिन सोमवती अमावस्या विशेष फलदायी रहेगी। ऐसा माना जाता है कि इस दिन ऋषि, पितृ और गौ पूजन करना भी विशेष लाभप्रद रहेगा।


चतुर्थ सोमवार दिलाएगा मान सम्मान :श्रावण मास का चौथा सोमवार 27 जुलाई को होगा। सुबह 7:10 बजे तक सप्तमी तिथि रहेगी, इसके बाद अष्टमी तिथि रहेगी। चित्रा नक्षत्र, साध्य योग, वाणिज करण विद्यमान रहेंगे। इस दिन सूर्य और विश्वकर्मा की पूजा विशेष उपयोगी रहेगी। इस पूजा से राजनीतिक उत्थान, उन्नति, यश, मान, प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। भूमि-भवन की भी प्राप्ति शीघ्र होगी।


पांचवें सोमवार : पांचवां और अंतिम श्रावण सोमवार तीन अगस्त को रहेगा। इस दिन पूर्णिमा तिथि, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, प्रीति तथा आयुष्मान योग रहेगा। इस दिन शिव पूजा के साथ भगवान सत्यनारायण, विश्व देव तथा ब्राह्मणां की पूजा तथा सम्मान देने से स्वास्थ्य की प्राप्ति होगी। इस दिन जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र, अन्नदान करना चाहिए।


सावन के महीने में पड़ने वाली मासिक शिवरात्रि का विशेष महत्व होता है। यह शिवरात्रि उतनी ही महत्वपूर्ण और फलयायी मानी जाती है जितनी फाल्गुन महीने की महाशिवरात्रि होती है। शिव भक्तों के लिए सावन का महीना अपने आराध्य देव की उपासना का महीना होता है। सावन के महीने में पड़ने वाले सोमवार का विशेष महत्व होता है। सोमवार का दिन भगवान शिव समर्पित होता है ऐसे में अगर सावन के महीने में सोमवार के दिन शिव पूजा करने पर हर तरह की मनोकामना अवश्य पूरी होती है। कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की लालसा में सावन के सोमवार के दिन व्रत रखती हैं। वहीं विवाह में आ रही अड़चनों को दूर करने लिए भी सावन का महीने का महत्व होता है।


मान्यता है कि जब देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन हुआ था तब उस दौरान समुद्र से निकले विष का पान भगवान शिव ने किया था। ताकि इस विष का असर संपूर्ण सृष्टि पर न पड़ें। विष के पीने से भगवान शिव के शरीर का ताप का काफी बढ़ गया था और उनको काफी परेशानी होने लगी थी। तब देवताओं ने भगवान शिव को इस परेशानी से छुटकारा दिलाने उन पर पानी की जमकर बौछारें डाली थी। यह महीना उस समय सावन का था। तभी से हर वर्ष सावन के महीने में भगवान शिव को जलाभिषेक करने की परंपरा है।


 


शिव पूजन में रखें विशेष सावधानी ---


भगवान शिवजी की पूजा में सफेद रंग के फूलों का इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि भगवान शिवजी को सफेद रंग के फूल सबसे ज्यादा प्रिय हैं। लेकिन उनकी पूजा में केतकी के फूलों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। कहा जाता है कि केतकी के फूल चढ़ाने से भगवान शिवजी नाराज होते हैं। इसके अलावा, तुलसी को कभी भी भगवान शिवजी को अर्पित नहीं किया जाता है। पण्डित दयानन्द शास्त्री बताते हैं की भगवान शिवजी की पूजा में नारियल का इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन शिवलिंग पर कभी भी नारियल के पानी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। क्योंकि शिवलिंग पर चढ़ाने वाली सारी वस्तुएं निर्मल होनी चाहिए। भगवान शिवजी को हमेशा कांस्य और पीतल के बर्तन से जल चढ़ाना चाहिए।