कल रवि पुष्य नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग का अत्यंत दुर्लभ शुभ संयोग :जाने और समझें पुष्य नक्षत्र में क्या करें, क्या ना करें

कल 11 अक्टूबर,2020 ( रविवार) को रवि पुष्य नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग का अत्यंत दुर्लभ शुभ संयोग बन रहा है। इस अवसर पर जो भी शुभ कार्य शुरू होगा वह अटल और चिरस्थाई होगा।हिंदू धर्म और ज्योतिष में कुछ तिथियां बहुत विशेष और शुभ मानी जाती है। विशेष तिथि और शुभ मुहूर्त में किया जाने वाला कोई भी काम जरूर सफल होता है।


इस बार पुष्य नक्षत्र अधिक मास अर्थात पुरुषोत्तम मास में पड़ रहा है। इस बार 10 अक्टूबर को पुष्य नक्षत्र रात 8.54 से 11 अक्टूबर रात 8.58 तक रहेगा इसलिए 10 को रवि पुष्य और 11 अक्टूबर को सोम पुष्य नक्षत्र रहेगा। यह ऐसा दिन हैं जबकि कोई भी आवश्यक शुभ कार्य किया जा सकता है। 


रवि पुष्य नक्षत्र योग को खरीददारी के लिए बहुत शुभ माना जाता है।


इस अधिक मास में 11 अक्टूबर,2020 ( रविवार) को रवि पुष्य नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग का अत्यंत दुर्लभ शुभ संयोग बन रहा है। इस अवसर पर जो भी शुभ कार्य शुरू होगा वह अटल और चिरस्थाई होगा। 


रवि पुष्य का योग रविवार को दिनभर रहेगा। ऐसे में पूरे दिन कभी भी खरीददारी की जा सकती है। इस योग में की गई खरीददारी न केवल शुभ होती है बल्कि इस मुहूर्त में खरीदी गई वस्तु खरीददार के लिए सुख-सौभाग्य और समृद्धि लेकर आती है। इस दिन कुछ विशेष प्रयोग करके आप अपने जीवन की सारी समस्याओं को दूर कर सकते हैं।रवि पुष्य योग के बारे में ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री  ने बताया कि यह योग इतना प्रभावकारी होता है कि ग्रहों की बुरी स्थितियां भी कोई प्रतिकूल परिणाम नहीं दे पातीं। कोई शुभ मुहूर्त नहीं हो तो रवि पुष्य योग में ही सभी कार्य किए जा सकते हैं। सभी कार्यों के शुभारंभ के लिए यह योग उत्तम माना गया है। इस योग में सोना खरीदना लाभदायक होता है। नए व्यापार और व्यवसाय की रवि पुष्य योग में शुरुआत करना भी श्रेष्ठ बताया जाता है


ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री  के अनुसार यह योग तंत्र-मंत्र की सिद्धि में विशेष फलदायी है। । विशेष बात यह है कि इस योग में साधना करने से सफलता मिलना तय है। भले ही कुछ समय लगे लेकिन भगवान से आप जो मांगोगे वह निश्चित रूप से मिलेगा।


इन उपायों से से होगा लाभ रवि पुष्य योग के दिन


1- धन लाभ के लिए रवि पुष्य नक्षत्र में भगवान विष्णु जी और मां लक्ष्मी का अभिषेक केसर युक्त दूध से करें।


2- रवि पुष्य नक्षत्र प्रारंभ होने के बाद 11 लघु नारियल की पूजा करके उन्हें लाल कपड़े में बांधकर धन स्थान में रखने से धन कोष में वृद्धि होती है।


3- रवि पुष्य नक्षत्र मे शंखपुष्पी की जड़ को प्राप्त करके चांदी की डिब्बी में डालकर उसे घर में स्थित तिजोरी में रखने से कभी धन की कमी नहीं होती।


4- रवि पुष्य योग में मोती शंख में जल भरकर लक्ष्मी माता की मूर्ति या चित्र के साथ रखने से लक्ष्मी प्रसन्न होती है।


5- रवि पुष्य संयोग में मोती शंख को घर में स्थापित कर प्रतिदिन श्री महालक्ष्मै नम: मंत्र को 11 बार बोलकर एक -एक चावल का दाना शंख में भरते रहें इस प्रकार 11 दिन तक करें यह प्रयोग करने से आर्थिक तंगी समाप्त हो जाती है।


6- रवि पुष्य नक्षत्र के दिन चांदी या सोने के आभूषण खरीदना अत्यंत शुभ होता है। इससे सुख.समृद्धि में उत्तरोत्तर बढ़ोतरी होती है।


7- रवि पुष्य नक्षत्र में सूर्यदेव की पूजा से मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा सबकुछ प्राप्त होता है। इस दिन भगवान सूर्य का विधिवत पूजन करें। सूर्योदय के समय जल का अ‌र्घ्य दें और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।


8- रवि पुष्य नक्षत्र के दिन किसी योग्य ज्योतिषी से सलाह लेकर माणिक रत्न सोने या तांबे की अंगूठी में बनवाकर अनामिका अंगुली में धारण करने से सूर्य शुभ प्रभाव देता है।


9- जिन लोगों की कुंडली में सूर्य की स्थिति खराब हो उन्हें रवि पुष्य नक्षत्र में किसी ब्राह्मण को गेहूं, गुड़ और तांबे का दान करना चाहिए।


रवि पुष्य नक्षत्र का शुभ मुहूर्त 


पुष्य नक्षत्र प्रारंभ 10 अक्टूबर मध्य रात्रि बाद 1 बजकर 16 मिनट से--


पुष्य नक्षत्र समाप्त 11 अक्टूबर मध्य रात्रि बाद 1 बजकर 17 मिनट तक..


रवि पुष्य नक्षत्र कब से कब तक रहेगा 


सभी कार्यों में सिद्धि प्रदान करने वाला रवि पुष्य का योग इस दिन सूर्योदय से आरम्भ होकर रात्रि 01 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में सभी 27 नक्षत्रों में 'पुष्य' नक्षत्र को सर्वश्रेष्ठ माना गया है।


सोम पुष्य नक्षत्र में क्या करें 


1. इस दिन चांदी खरीदना बहुत शुभ होता है। 


2. इस दिन खरीदी गई हर वस्तु शुभता तो लाएगी ही लाएगी, साथ ही साथ वह वस्तु जीवन में प्रगति भी प्रदान करेगी।


3. इस दिन यदि कोई आभूषण या प्रॉपर्टी खरीद रहे हैं तो शिवजी के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करके उनके चरणों में अर्पित करें।


4. इस दिन चंद्रदेव और शिवजी की पूजा करने से घर में सुख और शांति बनी रहती है। 


5. शिव की कृपा प्राप्त करने और उनके आशीर्वाद से हर इच्छा पूरी होने के लिए यह बहुत शुभ योग है।


6. सोम पुष्य योग में शिवजी को चावल चढ़ाने से आर्थिक लाभ के योग बनते हैं।


7. शिवजी को जौ अर्पित करने से सुख में वृद्धि होती है, वहीं गेहूं चढ़ाने से संतान वृद्धि होती है।


8. शिवजी और माता पार्वती को हरसिंगार अर्पित करने पर सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।


9. शिवजी को इस दिन धतूरे के फूल चढ़ाने पर कुल का नाम रोशन करने वाला पुत्र प्राप्त होता है।


10. इस दिन हीरा, ज्वेलरी और कपड़े खरीदना भी शुभ होता है।


क्या होता है पुष्य नक्षत्र


ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुल 27 नक्षत्र होते हैं जिनमें से पुष्य नक्षत्र 8 वां नक्षत्र होता है। यह बहुत ही बहुत ही शुभ और सुखद फल प्रदान करने वाला होता है। इसे सभी 27 नक्षत्रों में सबसे श्रेष्ठ और नक्षत्रों का राजा कहा जाता है। भगवान राम का जन्म भी इसी नक्षत्र में हुआ था। नक्षत्र हर रोज बदलते रहते हैं और हर दिन बदलने वाले नक्षत्र में पुष्य नक्षत्र भी शामिल है। हर 27वें दिन पुष्य नक्षत्र होता है। यह जिस दिन आता है, इसका नाम भी उसी प्रकार रखा जाता है।


पुष्य नक्षत्र में पैदा हुए व्यक्तियों का स्वभाव और भविष्य


पुष्य नक्षत्र को ज्योतिष शास्त्र में सबसे शुभ माना गया है। इसे सभी 27 नक्षत्रों में सबसे श्रेष्ठ और नक्षत्रों का राजा कहा जाता है। भगवान राम का जन्म भी इसी नक्षत्र में हुआ था। इस नक्षत्र में जन्में लोग बहुत मेहनती होते हैं और अपने दम पर जीने में भरोसा करते हैं। अपनी मेहनत की बदौलत धीरे-धीरे ही सही लेकिन कामयाबी जरूर हासिल करते हैं। कम उम्र में ही कई परेशानियों का सामना करते करते ये जल्दी परिपक्व और भीतर से मजबूत हो जाते हैं। इन्हें संयमित और व्यवस्थित जीवन जीना पसंद होता है।


इन चीजों के लिए होता है शुभ 


इस नक्षत्र में मंत्र दीक्षा, उच्च शिक्षा ग्रहण, भूमि, क्रय-विक्रय, आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करना, यज्ञ अनुष्ठान और वेद पाठ आरंभ करना, गुरु धारण करना, पुस्तक दान करना और विद्या दान करना और विदेश यात्रा आरंभ करने के लिए श्रेष्ठ होता है। 


पुष्य नक्षत्र में नहीं किए जाते हैं ये शुभ कार्य


पुष्य नक्षत्र में विवाह को छोड़कर अन्य कोई भी कार्य किया जा सकता है। माता पार्वती के श्राप के कारण पुष्य नक्षत्र में विवाह करना अशुभ माना गया है।