अपोलो अस्पताल, इंदौर में 250 से अधिक मिनिमली इनवेसिव कार्डिएक सर्जरी की गई

इंदौर : ज़रा सोचिए कि एक मरीज को हार्ट की बाईपास सर्जरी  के लिए अस्पताल में भर्ती होता है और वह तीन से चार दिनों में अस्पताल से डिस्चार्ज हो जाता है।  इतना ही नहीं लगभग 3 सप्ताह में वह अपने काम पर भी वापस आ जाता है। ऐसा कल्पना करना भी संभव नहीं लगता है।

मिनिमली इनवेसिव तकनीक के कारण अब कार्डियक बाईपास सर्जरी पहले से कहीं अधिक कारगर और आसान हो गई है। इसे मिनिमली इनवेसिव कार्डिएक सर्जरी (मिनी या एमआईसीएस MICS) के रूप में जाना जाता है। इसी तकनीक ने अब हार्ट सर्जरी के बाद रिकवरी को बहुत तेज़ बना दिया है। अस्पताल से जल्दी डिस्चार्ज होने और रोजमर्रा के जीवन में तेज़ी  से वापसी के लिए तकनीकी और सर्जिकल स्किल्स में हुई प्रगति को श्रेय देते हुए अपोलो हॉस्पिटल्स, इंदौर ने अपने विजय नगर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डिएक सर्जरी में 250 से अधिक मिनिमली इनवेसिव कार्डिएक सर्जरी (मिनी) को पूरा करने की घोषणा की।

पहले पारंपरिक (conventional) सर्जरी ही सीएबीजी (कोरोनरी आर्टरी बायपास ग्राफ्टिंग), वाल्व रिपेयर या रिप्लेसमेंट और दिल के छेदों को बंद करने के लिए एकमात्र विकल्प था। लेकिन अब मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी तकनीक के जरिए कई तरह की हार्ट सर्जरी बहुत ही छोटा चीरा लगाकर और बिना किसी हड्डी को काटे ज्यादा सटीक तरीके से की जा सकती है। इसमें मरीज की रिकवरी भी बहुत तेज़ी से होती है। इसके फलस्वरूप रक्तस्राव (blood loss)  बहुत कम होता है और इन्फ़ेक्शन की सम्भावना नगण्य हो जाती है।

भारत में होने वाली कुल मौतों में से 14.5% मौत दिल के दौरे के कारण होती है और मिनी सीएबीजी या की-होल बाईपास हृदय धमनी की बीमारियों (Coronary Artery  Disease) से पीड़ित रोगियों के लिए एक वरदान के रूप में उभरा है।

अपोलो हॉस्पिटल्स के सीनियर कंसलटेंट व डायरेक्टर डॉ अशोक बाजपेई ने कहा कि पहले जिन मरीजों को बायपास सर्जरी की सलाह दी जाती थी वे दर्द व बड़े चीरे के कारण या तो सर्जरी नहीं करवाते थे या सर्जरी करवाने का निर्णय लेने में बहुत देर कर देते थे। किंतु अब मिनी कार्डियक सर्जरी की वजह से, जिसमें की  नाममात्र दर्द एवं छोटा चीरा लगता है, ऐसे मरीज आवश्यक सर्जरी करवा पाते है।

डॉक्टर क्षितिज दुबे और उनकी पूरी टीम ने इस प्रोग्राम को इस स्तर पर लाने के लिए बहुत मेहनत की है  मैं उनको व उनकी  पूरी टीम को को बहुत बधाई देता हूं।

 

 

"इस साल मई में जब मुझे दिल की बीमारी का पता चला था तब मेरे एक डॉक्टर मित्र ने मुझे अपोलो अस्पताल में डॉ क्षितिज दुबे के बारे में बताया था, जो इस सर्जरी को करने वाले भारत के चुनिंदा अस्पतालों में से एक है। मैं अपने बेटे के साथ मैं डॉ दुबे से मिला और कुछ ही मिनटों में हमने सर्जरी के लिए मिनी सीएबीजी के विकल्प को चुना। मेरे अनुसार डॉ. दुबे शहर में इस तरह के ऑपरेशन करने वाले बेहतरीन सर्जन्स में से एक हैं। यह प्रक्रिया इतनी फायदेमंद है कि मैं कुछ ही हफ़्तों में अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या दोबारा शुरू कर सकता हूँ।"  यह कहना था अपोलो अस्पताल में मिनी CABG करवा चुके श्री हर्षवर्धन जैन  का।

इस अवसर पर डॉ. दुबे ने कहा, "मरीजों पर मिनी के परिणाम बहुत अच्छे है और यह तकनीक मरीज़ की रीकवरी को बहुत दर्द रहित और सरल बना देती है। किसी भी एडवांस्ड क्लीनिकल प्रोग्राम की सफलता अच्छी टीम, तकनीकी कौशल और लगातार उस सर्जरी को करते रहने पर निर्भर होती है। २५० से अधिक  सर्जरी करने के बाद हम अपने अनुभव के आधार पर विश्वासपूर्वक कह सकते हैं कि मिनी सुरक्षित और प्रभावी है। मिनी को चुनने वाला मरीज 2-3 सप्ताह के भीतर सामान्य जीवन और एक महीने के भीतर अपने काम पर लौट सकता है।  पारंपरिक ऑपरेशन के बाद  यह समय 2-3 महीने तक हो सकता है। मेरा जन्म इंदौर में ही हुआ है और मैं यही पला-बढ़ा हूँ इसलिए व्यक्तिगत रूप से मेरे लिए यह बहुत खुशी की बात है कि हम अपने शहर और राज्य में कार्डियक केयर को नई ऊँचाइयों तक पहुँचने में योगदान दे पा रहे  हैं।''

निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ.  विकास गुप्ता ने बताया “पारंपरिक शल्य चिकित्सा में सर्जन को हृदय तक पहुंचने के लिए ब्रैस्ट-बोन को काटना पड़ता है। इसके विपरीत मिनी सीएबीजी में छाती के  बाई ओर एक छोटे से २-३ इंच के  चीरे के माध्यम से बिना हड्डी को काटे, पसलियों के बीच से से हृदय तक पहुंचा जाता है।  इस कारण से मरीज़ को बहुत कम दर्द होता है और रिकवरी बहुत तेज होती है। इस ऑपरेशन को  विशेष निश्चेतना तकनीक एवं शल्य चिकित्सा उपकरणों के जरिए किया जाता है।” 

इस अवसर पर अपोलो हॉस्पिटल्स ने मरीजों के लिए एक विशेष मिनी हेल्पलाइन शुरू करने की भी घोषणा की, जिसके जरिए मरीज इस प्रक्रिया के बारे अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।  हेल्प लाइन नम्बर 7224803333 पर सम्पर्क कर सकते है।




--