विशेष संपादकीय- सामाजिक दायित्वों का सजग प्रहरी शब्द संचार

 


शब्द संचार ने 10 वर्ष का सफर पूर्ण कर 11 वे वर्ष में प्रवेश कर लिया है।पिछला डेढ़ वर्ष बेहद संघर्षशील रहा।कोरोना महामारी ने आपके इस समाचार पत्र को भी प्रभावित किया मगर बाबा बैजनाथ के आशीर्वाद से यह दिया इस मुश्किल दौर में भी प्रवज्जलित होता रहा।
नजर लक्ष्य पर थी गिरे ओर संभलते रहे।
हवाओ ने पूरा जोर लगा दिया फिर भी चिराग जलते रहे।
6 अक्टूबर 2011 को नगराधिपति बाबा बैजनाथ महादेव के श्रीचरणों मे पहली प्रति समर्पित कर,बाबा से कामना की थी कि साफ सुधरी व सामाजिक उत्थान से जुड़ी खबरों से ही शब्द संचार का  सरोकार रहे। बेशक हम इस बुनियाद के साथ ही आगे बड़ रहे है।मुश्किले इरादों को आजमाती रही पर हम टस से मस नही हुए।शब्द संचार सामाजिक दायित्वों के प्रति हमेशा बेहद सजग रहा है।मेरे लिए ये 10 साल 100 साल जैसे है।अखबार के महासमुन्द्र व सोशल मीडिया की तूफानी पत्रकारिता के बीच खुद को साप्ताहिक के रूप में बनाये रखना अभेद किले पर फतेह पाने जैसा था। अब हम भी जिले भर की ताजा तरीन खबरे शब्द संचार की वेबसाइट से तत्काल पाठको तक पहुचाने में सक्षम है।प्रतिकूल परिस्थितियों में झूझने का हौसला मुझे पाठक देते रहे। समाचार पत्र के संचालन में विज्ञापन नीव का कार्य करते है।इसीलिए शब्द संचार ने अपने पाठकों व विज्ञापनदातो को ही सब कुछ मान लिया था। यही कारण है कि इस वैश्विक महामारी के दौर में भी  हम सतत पाठको तक  पहुचते रहे। आज शब्द संचार 10 वर्ष का सफर पूरा कर 11 वे प्रवेश कर चुका है। शब्द संचार अब महज अखबार न होकर सम्पूर्ण जिले के आवाम की आवाज के रुप मे स्थापित हो चुका है। इस मुकाम तक पहुचाने के लिए धन्यवाद आगर... धन्यवाद पाठको...आपका स्नेह बरकरार रहे इन्ही उम्मीदों के साथ हम फिर चल पड़े है एक ओर नवीन पड़ाव का सर्जन करने...।आगे भी आपका आशीष बना रहे।
ख्वाहिशों” से नही गिरते हैं, “फूल” झोली में,
कर्म की साख़ को हिलाना होगा,
कुछ नही होगा कोसने से किस्मत को,
अपने हिस्से का दीया ख़ुद ही जलाना होगा।
●सत्यनारायण शर्मा
संपादक
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