दो साल में दोगुना हो गया शादियों का बजट:किराना, बर्तन, टेंट व कैटरिंग सभी पर महंगाई का असर, बजट बनाने के लिए मेहमानों की लिस्ट होने लगी है छोटी

 आगर-मालवा, शिवेन्द्रसिंह सिसौदिया । देवउठनी एकादशी से शुरू हुए वैवाहिक सीजन की ग्राहकी पूरे उफान पर है। शहरी और ग्रामीण ग्राहकों से बाजार भरे हुए है। शहरी क्षेत्र के साथ ग्रामीण अंचलों में भी शादियों की धूम है। कोरोना संक्रमण के कारण शादी-ब्याह के दो सीजन फ्लॉप शो साबित हुए थे। कई लोगों ने शादियां रद्द कर दी थी। जरूरी शादियां ही इस दौरान संपन्न हो पाई। व्यापारियों को उम्मीद है कि इस बार लग्नसरा का सीजन बढिया चलेगा। हालांकि शादियों पर महंगाई की मार भी नजर आ रही है। मध्यमवर्गीय लोगों की मुसीबतें खासी बढ गई है । जो कार्य ५0-६0 हजार में हो जाते थे अब उनका बजट बढकर ७५-८0 हजार तक पहुंच गया है। बिगडते बजट को देखकर मेहमानों की लिस्ट को भी छोटा किया जा रहा है ताकि खर्च बजट से बाहर न हो।



दीपावली के पहले तक सोने के भाव कम थे लेकिन एक बार फिर सोने की चमक बढने लगी है। सराफा व्यवसायी पवन मालानी ने बताया कि चांदी व सोने में दो-दो हजार रूपये की बढोत्तरी हुई है कैटरिंग, होटल, गार्डन, सभी के दाम बढ गये है। किराना में भी खासी महंगाई देखी जा रही है। किराना व्यापारी विजय शर्मा ने बताया कि २0१९ की तुलना में किराना खर्च डेढ गुना बढ गया है। सोयाबीन तेल १२00 से १३00 में १५ लीटर आता था जबकि वर्तमान रेट २२00 के आसपास है। शक्कर ३२00-३४00 रूपये क्विंटल थी वर्तमान भाव ३८00 से ४000 रूपयें क्विंटल है। चाय पत्ती २६0 रूपये किलो की थी जो अब ३६0 रूपये किलों हो गई। मिर्च-मसालों के साथ ड्रायफू्रट व अन्य सभी सामाानों के भावों मेें बढोत्तरी हुई है। कैटरिंग व्यवसायी सुशील जैन ने बताया कि उदाहरण के लिए जो आयोजन पहले दस हजार रूपये में हो जाता था उसके लिए पंद्रह हजार रूपये खर्च हो रहे है। सामान्य मीनू वाली प्लेट के भाव जो पहले २00 थे अब ३00 रूपये प्रति प्लेट हो गये है। गैस टंकी की कीमतों में भी बढोत्तरी हुई है। पेट्रोल-डीजल के कारण परिवहन महंगा हो गया है। वहीं मजदूरी भी काफी महंगी हो गई है। टेंट व्यवसायी दिलीप परिहार विश्वकर्मा ने बताया कि लेबर महंगी होने की वजह से लागत बढ गई है। जो छोटे आयोजन पहले ३0-३५ हजार के खर्च में संपन्न हो जाते थे उनका खर्च अब ५0-६0 हजार रूपये तक पहुंच गया है। स्थानीय स्तर पर लेबर मिलना मुश्किल हो गई है। झाबुआ और अलीराजपुर से लोगों को बुलाया गया है। लेबर पहले २५0-३५0 रूपये लेती थी जबकि आज ४00 से ५00 रूपये देना पड रहे है। ४00 देने के बाद भी दिन-भर का खाना खर्च भी देना पडता है। परिवहन भी महंगा हुआ है। स्थानीय लोग कार्य करने के लिए राजस्थान व अन्य जगहों पर चले जाते है इसलिए स्थानीय स्तर पर काफी समस्याओं का सामना करना पड रहा है। बर्तन व्यवसायी मुकेश कसेरा ने बताया कि २0१९ की तुलना में स्टील, पीतल, तांबा और एल्युमिनियम के भाव दोगुना हो गये है। २0१९ में स्टील १५0 रूपये किलो थी, वर्तमान भाव ३00 रूपये किलो, पीतल ३00 रूपये किलो  था वर्तमान भाव ६00 रूपये किलो, तांबा ४00 रूपये किलो था इसका वर्तमान भाव ८00 रूपये किलों है। एल्युमिनियम १00 किलो था जिसका भाव बढकर ३00 रूपये किलो हो गया है। बैड व्यवसायी रईस खान ने बताया कि सरकार ने सबकी मदद की लेकिन हमारी कोई नहीं सुन रहा है। काम करने वाले लोगों को एडवांस पैसा देना पडता है। महंगाई चरम पर है इसके बावजूद हमारे कार्य करने का मेहनताना नहीं बढ पा रहा है। नवंबर-दिसंबर माह की कुछ बुकिंग है।