गुप्त नवरात्रि में शक्ति की साधना :2 फरवरी 2022 से 10 फरवरी 2022

ज्योतिष रत्न पं. दिनेश शास्त्री

 मध्यप्रदेश संगठन मंत्री

 राष्ट्रीय ज्योतिष एवं रुद्राक्ष अनुसंधान संस्थान 

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।।या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

       एक वर्ष में चार नवरात्र पड़ते है। आषाढ़ और माघ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाले नवरात्र गुप्त नवरात्र कहलाते हैं। हालांकि गुप्त नवरात्र को आमतौर पर नहीं मनाया जाता लेकिन तंत्र साधना करने वालों के लिये गुप्त नवरात्र बहुत ज्यादा मायने रखते हैं। तांत्रिकों द्वारा इस दौरान देवी मां की साधना की जाती है। शरद ऋतु में आने वाले आश्विन मास के नवरात्र को शारदीय नवरात्र कहा जाता है। बसंत ऋतु में होने के कारण चैत्र नवरात्र को वासंती नवरात्र भी कहा जाता है। 

नवरात्री का महत्व :-  जयति जयति जगदंब भवानी, तुम सम और दयालु ना दानी ।। 

      भक्तों की रक्षा व देव कार्य अर्थात्‌ कल्याण के लिए भगवती दुर्गा ने नौ दिनों में नौ रूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघण्टा, कुशमांडा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री को प्रकट किया। नौ दिनों तक महाभयानक युद्ध कर शुंभ-निशुंभ, रक्तबीज आदि अनेक दैत्यों का वध कर दिया। भगवती ने पृथ्वी व देव लोक में पुनः नवचेतना, कल्याण, ओज, तेज, साहस, प्राण व रक्षा शक्ति का संचार कर दिया। उस शक्ति के आश्रय व कृपा से ही देव, दनुज, मनुज, नाग, किन्नर, गंधर्व, पितृ, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी व कीट आदि चलायमान हैं। ऐसी परम शक्ति की सत्ता का सतत्‌ अनुभव करने वाली सुसंस्कृत, पवित्र, वेदगर्भा भारतीय भूमि धन्य है। हमारे वेद, पुराण व शास्त्र गवाह हैं कि जब-जब किसी आसुरी शक्ति ने अत्याचार व प्राकृतिक आपदाओं द्वारा मानव जीवन को तबाह करने की कोशिश की है, तब-तब किसी न किसी दैवीय शक्ति का अवतरण हुआ। इसी प्रकार जब महिषासुरादि जैसे दैत्यों के अत्याचार से पृथ्वी व देवलोक व्याकुल हो उठे तो परमेश्वर की प्रेरणा से सभी देव गणों ने एक अद्भुत शक्ति संपन्न देवी का सृजन किया जो आदि शक्ति माँ जगदम्बा के नाम से सम्पूर्ण ब्रह्मांड की अधिष्ठात्री बनीं।

।। जो जो शरण तुम्हारी आवे, सो सो मनवांछित फल पावे ।।

 जिस व्यक्ति को बार-बार कर्म करने पर भी सफलता न मिलती हो, उचित आचार-विचार के बाद भी रोग पीछा न छोड़ते हों, अविद्या, दरिद्रता प्रयासों के बाद भी नहीं होती हों या किसी नशीले पदार्थ शराब, भाँग, अफीम, धतूरे का विष व सर्प, बिच्छू आदि का विष जीवन को तबाह कर रहा हो। मारण-मोहन-अभिचार के प्रयोग अर्थात्‌ (मंत्र-तंत्र), कुल देवी-देवता, डाकिनी-शाकिनी, ग्रह, भूत-प्रेत बाधा, राक्षस-ब्रह्मराक्षस आदि से जीना दुभर हो गया हो। चोर, लुटेरे, अग्नि, जल, शत्रु भय उत्पन्न कर रहे हों या स्त्री, पुत्र, बाँधव, राजा आदि ने अनीतिपूर्ण तरीकों से देश या राज्य से बाहर कर दिया हो, सारा धन हड़प लिया हो, उसे दृढ़ निश्चय होकर विश्वासपूर्वक माँ भगवती की शरण में जाना चाहिए। स्वयं व वैदिक मंत्रों में निपुण विद्वान ब्राह्मण की सहायता से माँ भगवती की आराधना तन-मन-धन से करनी चाहिए। इससे भक्तों की समस्त मनोकामनाएँ माँ पूरी कर देती हैं।