महादेव के आंगन में 4८ वर्षो से गूंज रही है रामायण की चौपाईयां:,ग्रामो की अलग-अलग मंडलियां अपने क्रम पर पहुंचकर करती है रामायण पाठ

 

आगर मालवा (सत्यनारायण शर्मा) । आगर के अधिपति बाबा बैजनाथ महादेव की महिमा अपरंपार है । जिले का यह मुख्य शिवालय वर्षो से जनआस्था का केंद्र है । सावन माह में बाबा के दरबार में शीश नवाने वाले भक्तों का तांता लगा रहता है , यहाँ सभा मंडप में पिछले 4८ वर्षों से अखंड रामायण पाठ हो रहा है । खास बात यह है की रामायण पाठ करने की व्यवस्था का संचालन भी अदभुत है । अलग-अलग ग्रामो की भजन मंडलिया अपने अपने तयशुदा समय पर यहाँ पहुचकर पाठ करती है यह परंपरा वर्षो से इसी तरह अनवरत जारी है। 



नगर से 4 किमी दूर स्थित बाबा बैजनाथ महादेव मंदिर वर्षों से जिले सहित अन्य प्रदेशवासियों के लिए भी आस्था का केन्द्र है। वर्ष भर मध्यप्रदेश सहित राजस्थान, गुजरात व दिल्ली तक के श्रद्धालु बाबा के दरबार में पहुंचते है। सावन माह में यहां अलौकिक दृश्य देखते ही बनता है। मंदिर परिसर के चारों तरफ फैली हरियाली मन मोह लेती है। जय नारायण बापजी श्री के लिए भगवान भोलेनाथ स्वयं पैरवी करने पहुंचे थे। कर्नल मार्टिन की रक्षा हेतु भोलेनाथ का अफगानिस्तान में प्रकट होना जैसे कई चमत्कार बाबा बैजनाथ की प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैलाते रहे है। मंदिर के गर्भगृह में अखंड ज्योत प्रज्जवलित हो रही है। वहीं सभा मंडप में पिछले 4८ वर्षो से अखंड रामायण पाठ जारी है। बताया जाता है कि सन १९७४ में रामायण पाठ की शुरूआत की गई थी। बाद में यह परंपरा विशाल रूप धारण करती गई और रामायण भक्त मंडल का गठन हो गया। यही से इस परंपरा को आगे तक ले जाने की नींव रखी गई। करीब १६०-१६५ गांवों के लोग रामायण पाठ से जुडे हुए है। रामायण पाठ वाले स्थल के अग्रभाग में सूचना पटल पर ग्रामीणों की सूची लिखी हुई है। इसी क्रम में तयशुदा दिनांक को उक्त गांव के ग्रामीण पहुंचते है और रामायण पाठ करते है। इस दौरान रातभर भजन-कीर्तन किये जाते है। कुछ समय तक रामायण मंडल के अध्यक्ष यह व्यवस्था देखते रहे। अब मंदिर प्रबंध समिति ही संचालन करती है। संचालन का कार्य वर्तमान समय में पारस मित्तल देखते है। प्रतिवर्ष रामायण पाठ के निमित्त महाशिवरात्रि पर्व पर पांच दिवसीय यज्ञ का आयोजन किया जाता है। बैजनाथ महादेव मंदिर के महंत आनंदपुरी ने बताया कि सन १९७४ में बाबा के दरबार में ग्राम आठवां मिल निवासी स्वर्गीय कल्याणसिंह द्वारा अखण्ड रामायण पाठ की शुरूआत की गई थी। ग्राम कसाई देहरिया के लच्छु गुर्जर, परसुखेड़ी के भगवानसिंह यादव,लाड़वन के शिवनरायण गुर्जर, निपानिया के दुलेसिंह, लाईनमेन चौधरी, कन्हैयालाल  यादव, रामलाल तंवरआदि अखण्ड रामायण पाठ से जुड़े रहे।